बालोद। शहर की जीवनदायिनी कही जाने वाली ऐतिहासिक खरखरा कैनाल आज अतिक्रमण की समस्या से…
बालोद। शहर की जीवनदायिनी कही जाने वाली ऐतिहासिक खरखरा कैनाल आज अतिक्रमण की समस्या से जूझ रही है। शिकारीपारा से आमापारा तक नहर की सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इस गंभीर जनहित के मुद्दे को एक बार फिर जनसेवक उमेश कुमार सेन ने प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
उमेश कुमार सेन का कहना है कि खरखरा कैनाल केवल एक जलमार्ग नहीं, बल्कि बालोद शहर और जिले की सिंचाई व्यवस्था की महत्वपूर्ण धुरी है। इसके बावजूद नहर की भूमि पर अतिक्रमण बढ़ना चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई स्थानों पर नहर की भूमि का उपयोग निजी प्रयोजनों के लिए किया जा रहा है, जिससे इसके मूल स्वरूप और जल प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी भूमि पर लगातार अतिक्रमण की शिकायतें सामने आ रही हैं, तब संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यदि नहर की भूमि पर निर्माण कार्य या अन्य गतिविधियां हो रही हैं तो इसकी जवाबदेही किसकी है? प्रशासन को इन सवालों का जवाब जनता के सामने रखना चाहिए।
उमेश कुमार सेन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो आगामी बारिश के मौसम में जल निकासी प्रभावित होने से शहर के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। वहीं, नहर के प्राकृतिक स्वरूप में बदलाव आने से भू-जल स्तर और पर्यावरण पर भी दीर्घकालीन प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि राजस्व एवं सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम द्वारा शिकारीपारा से आमापारा तक नहर की भूमि का सीमांकन कराया जाए, अवैध अतिक्रमण पाए जाने पर नियमानुसार निष्पक्ष कार्रवाई की जाए तथा यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा शिकायतों की अनदेखी की गई है तो उनकी जिम्मेदारी भी तय की जाए।
उमेश कुमार सेन ने कहा कि यह राजनीति का नहीं, बल्कि बालोद के वर्तमान और भविष्य का विषय है। यदि आज खरखरा कैनाल को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने बालोदवासियों से भी अपील की कि वे सार्वजनिक संपत्तियों और जल संसाधनों के संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
अब जिलेवासियों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या खरखरा कैनाल को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे या फिर यह महत्वपूर्ण जनहित का मुद्दा भी केवल फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा?








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