संवैधानिक मूल्यों व बाबासाहेब आंबेडकर की विरासत का राजनीतिक लाभ के लिए न हो चयनात्मक इस्तेमाल- उमेश कुमार बर्मन
रायपुर (खबर निरीक्षण)सतनामी समाज छत्तीसगढ़ (युवा प्रकोष्ठ) के जिलाध्यक्ष उमेश कुमार बर्मन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर पार्टी की भूमिका, चयनात्मक विरोध प्रदर्शनों और सामाजिक न्याय के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्य बिंदु एवं प्रमुख बातें:
राजनीतिक सुविधा बनाम सामाजिक न्याय: पत्र में कहा गया है कि अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर इंडिया गेट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के विरोध-प्रदर्शन ने उसके राजनीतिक दृष्टिकोण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। समाज ने सवाल उठाया है कि क्या कांग्रेस के लिए सामाजिक न्याय एक वास्तविक प्रतिबद्धता है या केवल राजनीतिक लाभ उठाने का एक साधन?
समान मानदंडों और सिद्धांतों के पालन की मांग: दलित बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और सामाजिक न्याय से जुड़े संगठनों के हवाले से पत्र में उल्लेख किया गया है कि संवैधानिक मूल्यों का इस्तेमाल राजनीतिक सुविधा के अनुसार नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस को अपने राजनीतिक आचरण में भी समान मानदंडों का पालन करना चाहिए।
बाबासाहेब आंबेडकर की विरासत पर बल: पत्र में स्पष्ट किया गया है कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की विरासत केवल संविधान का नाम लेने में नहीं, बल्कि बौद्धिक ईमानदारी, सिद्धांतनिष्ठ आचरण और सभी के लिए समान मानदंड अपनाने में निहित है।
आत्ममंथन करने का आग्रह: सतनामी समाज के जिलाध्यक्ष ने कांग्रेस नेतृत्व से आत्ममंथन करने का आग्रह किया है कि सामाजिक न्याय के प्रति उसकी तत्परता केवल राजनीतिक विरोधियों को घेरने के अवसरों पर ही क्यों दिखाई देती है।
पत्र के अंत में उमेश कुमार बर्मन ने जोर देकर कहा कि देश को राजनीतिक अवसरवाद की नहीं, बल्कि सिद्धांतों, संस्थागत जवाबदेही और समानता के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता पर आधारित राजनीति की आवश्यकता है।

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