सारंगढ़ बिलाईगढ़-दवाओं के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग, उचित औषधीय परामर्श तथा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में फार्मासिस्टों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से आज विश्व फार्मासिस्ट दिवस मनाया जा रहा है। वर्ष 2026 की थीम “Empowering pharmacists for healthier futures” अर्थात “स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना” है।फार्मासिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। दवाओं का सुरक्षित भंडारण, उपलब्धता, वितरण, गुणवत्ता बनाए रखना तथा मरीजों को दवा के सही उपयोग की जानकारी देना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सारंगढ़ के फार्मासिस्ट योगेश्वर चन्द्रम ने कहा कि वर्तमान समय में फार्मासिस्ट की भूमिका केवल दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। मरीज को सही दवा, सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से दवा लेने की जानकारी देना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में फार्मासिस्ट मरीज और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं।
25 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है?
विश्व फार्मासिस्ट दिवस प्रत्येक वर्ष 25 सितंबर को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1912 में International Pharmaceutical Federation (FIP) की स्थापना हुई थी। वर्ष 2009 में FIP कांग्रेस के दौरान इस दिवस को मनाने की पहल हुई और वर्ष 2010 से इसका वैश्विक आयोजन शुरू हुआ।
भारत में फार्मेसी शिक्षा के विकास में प्रो. महादेवा लाल श्रॉफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिन्हें व्यापक रूप से “Father of Pharmacy Education in India” कहा जाता है।
छत्तीसगढ़ में फार्मासिस्ट अस्पतालों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, औषधि भंडारण एवं आपूर्ति, मेडिकल स्टोर्स तथा फार्मास्युटिकल क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी फार्मासिस्टों ने दवाओं की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विश्व फार्मासिस्ट दिवस फार्मासिस्टों के योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ स्वास्थ्य व्यवस्था में उनके ज्ञान, कौशल और विशेषज्ञता को उचित स्थान देने का अवसर भी है।योगेश्वर चन्द्रम ने इस अवसर पर सभी फार्मासिस्ट साथियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि फार्मासिस्टों को स्वास्थ्य व्यवस्था में अधिक अवसर और उचित भूमिका मिलने से जनस्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

More Stories
लगातार बारिश के बीच नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन हाई अलर्ट, जिले में बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था सक्रिय
नगर पंचायत पवनी में जिला स्तरीय महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित
बाढ़ और जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को दिए आवश्यक निर्देश