February 5, 2026

मोदी सरकार ने छीना श्रमिको का अधिकार- डहरिया

खबर शेयर करें

सारंगढ़ बिलाईगढ़- सारँगढ़ बिलाईगढ़ जिला कांग्रेस कार्यलय सिटी सेंटर में पत्रकार वार्ता आयोजित किया गया जिसमे पूर्व मंत्री शिव कुमार डहरिया भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर बरसे ,भाजपा सरकार गरीब मजदूर श्रमिक का अधिकार लूटने का कार्य कर रही है मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है।

मोदी सरकार ने ‘सुधार’ के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जान-बूझकर की गई कोशिश है।

अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है।

मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण था, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मज़दूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है। दो दशकों से, मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफलाइन रहा है और कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर ज़रूरी साबित हुआ है।

अब तक मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था, श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते थे, जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया,

मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोजगार बंद करने की इजाजत देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा। एक बार फंड खत्म हो जाने पर, या फसल के मौसम में, मज़दूरों को महीनों तक रोज़गार से दूर रखा जा सकता है।
मनरेगा केंद्रीय कानून था, 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते थे, अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60-40 का हो जाएगा, पहले मैचिंग ग्रांट 50 प्रतिशत राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगा, राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी।

मोदी सरकार अब राज्यों पर “जी राम जी” का लगभग 50,000 करोड़ का बोझ डालना चाहती है, उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

मनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो कोरोना जैसे मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी।

100 दिन से 125 दिन की मजदूरी वाली बात सिर्फ एक चालाकी है, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया जा रहा है। पिछले 11 सालो में मोदी सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम देने का राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का है। मतलब 11 सालो में मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन काम नहीं दे पाई।

मनरेगा काम करने का सही अधिकार था, उसे अब एक एडमिनिस्ट्रेटिव मदद में बदला जा रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है।

भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर झूठ बोल रही है। “V.B.G.RAM.G.” में जो राम जी बता रहे उसमें कही भी भगवान राम नहीं है। “V.B.G.RAM.G.” का फूल फार्म है

(विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन-ग्रामीण) है।

मनरेगा में (पहले था)

मोदी सरकार ने क्या बदला (जी राम जी)

हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी

अब आपके पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी

हर गांव में काम की कानूनी गारंटी मिलती थी

काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा

आप पूरे साल काम की मांग कर सकते थे

फसल कटाई के मौसम में आपको काम नहीं मिलेग।

आपको कानूनी न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी गई थी

आपकी मजदूरी सरकार अपनी मर्जी से तय करेगी

ग्राम पंचायत के जरिए अपने ही गांव के विकास के लिए काम मिलता था

अब आप कहां और क्या काम करेंगे, यह सरकार तय करेगी

आपके काम में मनरेगा मेट और रोजगार सहायकों की मदद मिलती थी

अब आपको किसी मेट या रोजगार सहायक की मदद नहीं मिलेगी

आपकी मज़दूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकार बिना किसी चिंता या कठिनाई के आपको काम उपलब्ध कराती थी

प्रेसवार्ता में उपस्थित रहे सारँगढ़ विधायक श्रीमती उतरी गनपत जांगड़े,बिलाईगढ़ विधायक श्रीमती कविता प्राण लहरे,कांग्रेस जिलाध्यक्ष ताराचंद्र देवांगन, पूर्व विधायक पद्मा,श्रीमती सोनी अजय बंजारे, घनश्याम मनहर, सूरज तिवारी, संजय दुबे,पुरूषोत्तम साहू, गोल्डी नायक, घनश्याम मनहर, रामनाथ सिदार, नीतीश बंजारे,कु सरिता मल्होत्रा अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ता