March 25, 2026

किसान से 1 लाख लेकर मशीन दिलाने का झांसा, फिर जेल तक पहुँचा मामला — कृषि विस्तार अधिकारी पर गंभीर आरोप, कलेक्टर से जांच की मांग

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बालोद / गुंडरदेही

जिले में किसानों को शासन की योजना के नाम पर मशीन दिलाने के नाम पर पैसे लेने और बाद में उसी मामले में किसान को ही जेल भेजे जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। ग्राम परसदा, तहसील गुंडरदेही निवासी किसान प्रभुराम साहू ने कलेक्टर बालोद को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

आवेदन में किसान ने बताया कि वर्ष 2020 में कृषि विभाग के माध्यम से धान काटने की रीपर मशीन दिलाने का प्रस्ताव कृषि विस्तार अधिकारी पंकज कुलदीप द्वारा दिया गया। किसान के अनुसार मशीन की कीमत 1.5 लाख रुपये बताई गई, जिसमें शासन से 50 हजार रुपये अनुदान मिलने की बात कही गई। इसके बाद किसान से 1 लाख रुपये नकद जमा करवाए गए।

किसान का आरोप है कि पैसे जमा करने के बाद मशीन तो दे दी गई, लेकिन बाद में कंपनी द्वारा बार-बार फोन कर यह कहा गया कि मशीन का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। जब इस संबंध में कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने हर बार यह कहकर टाल दिया कि “आप चिंता मत करें, आपका काम पूरा हो चुका है, कंपनी वाले बेवजह परेशान कर रहे हैं।”

मामला तब गंभीर हो गया जब फरवरी 2026 में कांकेर जिले के परसांडा थाना पुलिस किसान के घर पहुँची और रीपर मशीन का पैसा जमा नहीं होने के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया। किसान को 24 से 26 फरवरी तक कांकेर जेल में रहना पड़ा और बाद में जमानत पर रिहाई हुई।

जेल से लौटने के बाद किसान ने फिर से संबंधित अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिलता रहा। किसान ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि इसी प्रकार की शिकायत अन्य किसानों से भी मिली है, जिससे पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका और गहरा गई है।

आवेदन में किसान ने कलेक्टर से मांग की है कि

पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए

दोषी अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई हो

किसान को हुए आर्थिक और मानसिक नुकसान की भरपाई की जाए

किसान ने अपनी खराब मानसिक स्थिति का जिक्र करते हुए लिखा है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वह इस परेशानी से उबर नहीं पाएगा।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और क्या किसानों को योजनाओं के नाम पर हो रही कथित अनियमितताओं से राहत मिल पाती है या नहीं।