March 31, 2026

मरसकोला में गोंडवाना गोंड समाज का वार्षिक अधिवेशन संपन्न, शिक्षा और सामाजिक एकता पर जोर

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डौंडी लोहारा (बालोद)।
डौंडी लोहारा विकासखंड के परीक्षेत्रीय आंतरगांव अंतर्गत ग्राम मरसकोला में गोंडवाना गोंड समाज का एक दिवसीय वार्षिक अधिवेशन परंपरागत रीति-रिवाजों और सामाजिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। हर वर्ष आयोजित होने वाला यह अधिवेशन इस बार भी सामाजिक एकता, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के मजबूत संदेश के साथ आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत समाज की महिलाओं द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा और गली भ्रमण से हुई, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा और धार्मिक आस्था की सुंदर झलक देखने को मिली। इसके पश्चात ध्वजारोहण कर बुढ़ा देव की गोंडी पद्धति से विधिवत पूजा-अर्चना कर अधिवेशन का शुभारंभ किया गया।

अधिवेशन में उपस्थित मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों का पारंपरिक ढंग से पीला गमछा, तिलक और नारियल भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

तहसील अध्यक्ष इंद्रपाल तुमरेकी ने अपने संबोधन में शिक्षा को समाज की प्रगति का मूल आधार बताते हुए युवाओं को शिक्षित बनने का आह्वान किया। उन्होंने चिंता जताई कि जहां बेटियां निरंतर आगे बढ़ रही हैं, वहीं कई स्थानों पर बेटे शिक्षा के क्षेत्र में पीछे रह रहे हैं। अपने शिक्षक जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने युवाओं से समाज के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा के जिला अध्यक्ष प्रेमलाल कुंजाम ने कहा कि वार्षिक अधिवेशन समाज के लिए आत्ममंथन का अवसर होता है, जिसमें वर्षभर के कार्यों, आय-व्यय और समस्याओं की समीक्षा की जाती है। उन्होंने महिला, पुरुष और युवा—तीनों वर्गों की समान भागीदारी को समाज के समग्र विकास के लिए अनिवार्य बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में पारंपरिक ज्ञान का हस्तांतरण कमजोर पड़ रहा है, जिससे नई पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है। कस्टमरी कानून की जानकारी को आवश्यक बताते हुए उन्होंने छोटे-छोटे विवादों का समाधान समाज के भीतर ही करने पर जोर दिया और धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी समाज को सजग रहने की सलाह दी।

विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित “कोया बूम” के लेखक धर्मपाल कोड़ापे ने ग्राम व्यवस्था, सामाजिक परंपराओं और जीवन चक्र—जन्म, विवाह और मृत्यु—की संरचना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक बीज से पौधा विकसित होता है, उसी तरह बच्चों का भविष्य उनके संस्कार और पालन-पोषण पर निर्भर करता है। उन्होंने माता-पिता को बच्चों का प्रथम गुरु बताते हुए पारंपरिक ज्ञान को लिखित रूप में संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

रेंगाडबरी क्षेत्र की महिला अध्यक्ष धनेश्वरी मंडावी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सामाजिक रीति-नीतियों की समझ और नशा मुक्ति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति परिवार और समाज दोनों को कमजोर कर रही है, इसलिए अभिभावकों को पहले स्वयं सुधार कर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत गोंडी सांस्कृतिक नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर प्रस्तुत इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में समाज की समृद्ध परंपरा की झलक स्पष्ट दिखाई दी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को समाज के पदाधिकारियों द्वारा पुरस्कार एवं आशीर्वाद प्रदान किया गया।

अधिवेशन में विशेष रूप से लाल निवेंद्र सिंह टेकाम (नगर पंचायत अध्यक्ष, डौंडी लोहारा), तुकाराम कोर्राम (अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज जिला बालोद), जितेश्वरी पडोटी (अध्यक्ष, गोंड महासभा महिला प्रभाग जिला बालोद), कुशल सिंह मंडावी (अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज तहसील डौंडी लोहारा), बीरेन्द्र मंडावी (सचिव, गोंड महासभा तहसील डौंडी लोहारा), राजकुमार प्रभाकर (अध्यक्ष, गोंडवाना गोंड महासभा परीक्षेत्र डौंडी लोहारा), दुष्यंत ओटी (गायता पुजारी, छत्तीसगढ़ गोंड महासभा बालोद), एम.एस. मंडावी (भारतीय स्टेट बैंक, डौंडी लोहारा), एन.एस. ठाकुर (शिक्षक), पृथ्वीपाल मंडावी (संरक्षक, परीक्षेत्र अतरगांव), मीना बाई कोर्राम (सरपंच, ग्राम पंचायत करतुटेला) एवं बिमला कोरेटी (अध्यक्ष, महिला प्रभाग डौंडी लोहारा) उपस्थित रहे।

अन्य पदाधिकारियों में बजरंग मंडावी (सर्किल अध्यक्ष नंगूटोला), चम्पाराम मरकाम (सर्किल अध्यक्ष तुमड़ीकसा), जगदीश राम मंडावी (सर्किल अध्यक्ष अतरगांव), अनुज मंडावी (सर्किल अध्यक्ष सिर्राभाठा) और दिनेश कुमार उइके (सर्किल अध्यक्ष महाराजपुर) की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में जय बुढ़ा देव मांदरी दल, भैंसाबोड़ द्वारा प्रस्तुति दी गई, जिसने आयोजन में पारंपरिक रंग भर दिया।

आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसमें अध्यक्ष तुलाराम मंडावी (परीक्षेत्र उपाध्यक्ष अतरगांव), सचिव राजेश कुमार नेताम (मुख्य सचिव), सह सचिव सरजीत कतलाम, युवा प्रभाग अध्यक्ष दान छेदैया, कोषाध्यक्ष उदयराम ओटी, महिला प्रभाग अध्यक्ष किरण पडोटी, उपाध्यक्ष बसंती कोहकट्टा तथा संरक्षक मंशाराम नेताम एवं तेजराम नेताम सक्रिय रूप से शामिल रहे।

अधिवेशन के समापन अवसर पर समाज के सभी उपस्थित लोगों ने शिक्षा के प्रसार, सामाजिक एकता को मजबूत करने और अपनी पारंपरिक संस्कृति एवं रीति-रिवाजों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।