October 18, 2026

तोरेसिंहा धान खरीदी मामले में उठे सवाल,,,किसान के रकबे से अधिक धान बेचने का दावा ?

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ओमप्रकाश चौधरी के कार्यालय से बोलने का दावा करने वाले भाजपा नेता का कांग्रेस शासन की धान खरीदी व्यवस्था को लेकर बयान चर्चा में

सरायपाली (गेंददास मानिकपुरी)महासमुंद जिले के तोरेसिंहा में धान खरीदी को लेकर एक मामला सामने आया है, जिसमें किसान के पास उपलब्ध कृषि भूमि और अलग-अलग केंद्रों में धान बिक्री की मात्रा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में किसान मनोज कुमार पटेल का नाम सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किसान के पास कुल रकबा 7.1000हे.जमीन पंजीयन हुवा. जिसमे गिदावरी हुवा धान रकबा 6.8100 होना पाया गया है, जबकि उसके द्वारा बीज निगम में 2हे. 2 हे.कुल 4 हे.तथा तोरेसिंहा में 6 हे.के रकबे से संबंधित धान बेचने की जानकारी सामने आई है।

यदि यह जानकारी सही है, तो कुल रकबे और दोनों स्थानों पर दर्ज धान बिक्री के रिकॉर्ड का मिलान किया जाना जरूरी है। हालांकि, इस मामले में वास्तविक धान बिक्री की मात्रा, पंजीकृत रकबा और संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है।

भाजपा नेता
के बयान ने खींचा ध्यान

इस मामले में एक भाजपा नेता का बयान भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि उक्त नेता ने स्वयं को ओमप्रकाश चौधरी के कार्यालय से बोलने वाला बताते हुए कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का उल्लेख किया और कहा कि उस समय किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती थी।
भाजपा मे रह कर कांग्रेस का गुणगान करने वाला भाजपा नेता ट्रू कालर मे दीनू नायक आया है.

ऐसे में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर दिए गए इस बयान और तोरेसिंहा के सामने आए मामले के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। क्या संबंधित किसान के धान बिक्री रिकॉर्ड की जांच की गई है? क्या दोनों केंद्रों पर दर्ज रकबे का सत्यापन हुआ है? यदि रिकॉर्ड में अंतर है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

मामले की निष्पक्ष जांच कर किसान के पंजीकृत रकबे, धान खरीदी केंद्रों के रिकॉर्ड, टोकन और बिक्री संबंधी दस्तावेजों का मिलान किया जाना चाहिए। साथ ही, संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि तथ्यों के आधार पर वास्तविकता सामने आ सके।

फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि 7 हे.जमीन वाले किसान के नाम पर दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज रकबे की वास्तविक स्थिति क्या है और इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का क्या पक्ष है। आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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