October 28, 2026

पीआरपी आशा साहू के ट्रांसफर से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल,ट्रांसफर से घोटाले की फाइल दबाने की कोशिश

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सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बिहान योजना बनी भ्रष्टाचार का अड्डा

​सारंगढ़-बिलाईगढ़ टारजन महेश ( खबर निरीक्षण ) – छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले मे प्रशासनिक खेला भी क्या खूब चल रहा है जहाँ गले तक पैसे गटक जाओ या घोटाले की दलदल मे क्यों न रहो लेकिन अधिकारी आपको डूबने नहीं देंगे आपको किसी न किसी पैतरे से फंसता दलदल से आपको खींच ही लेंगे ऐसा ही एक मामला सारंगढ़ से उजागर हुआ है जहाँ लाखो की अनियमितता करने के बावजूद भी बड़े ही आराम से घोटाले बाज अपनी नौकरी कर रहे है बस फर्क है आज यहाँ तो कल हुआ बस स्थान बदलता है फितरत नहीं

बिहान मे घोंटाला करोगे तो कार्यवाही नहीं ट्रांसफर का मिलेगा इनाम

सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) इन दिनों अपनी मूल अवधारणा से भटककर भ्रष्टाचार का गढ़ बनता नजर आ रहा है। जिले में “लखपति दीदी” बनाने के सपने दिखाने वाली यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर दम तोड़ती दिख रही है, और ग्रामीण महिलाओं की स्थिति “लखपति” की बजाय कर्ज के बोझ तले दबी “सड़क दीदी” जैसी हो गई है। हाल ही में इस योजना से जुड़ीं पीआरपी (PRP) आशा साहू पवनी के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए और जांच के आदेश से घोटाले और घोटाले बाजो का नाम पर परत डाल दबा दिया गया है लेकिन अचानक उनका ट्रांसफर किए जाने के बाद अब पूरे प्रशासन की कार्यशैली और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

​कमीशन के खेल और मिलीभगत के गंभीर आरोप

​मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखी चर्चा है कि क्या केवल एक पीआरपी का ट्रांसफर कर इस पूरे भ्रष्टाचार के प्रकरण को दबाने की कोशिश की जा रही है? सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जिला पंचायत प्रबंधन कमीशन के खेल के आगे नतमस्तक हो चुका है? चर्चा यह भी है कि जिला स्तर पर बड़े पैमाने पर कमीशन पहुंचाये जाने की बात सामने आई है, लेकिन उच्च पदस्थ अधिकारियों और संलिप्त अन्य लोगों पर कार्रवाई करने से प्रशासनिक अमला कतरा रहा है। आखिर इस पूरे खेल में कथित तौर पर संलिप्त ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर (BPM) संदीप तम्बोली और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों का नाम सामने आया था जिसमे कोई ठोस कार्रवाई इसलिए नहीं किया गया क्योंकि इस भ्रष्टाचार मे पूरा चैनल सिस्टम जुडा हुआ है घोटाले का केक कटता और सब मे बंटता है

PRP आशा साहू नोटिस के लिखित जवाब मे अधिकारी नाम कर रही थी उजागर फिर एक दुसरे को बचाने का हुआ मांडवाली खेल – सूत्र

वही जिस तरह से लगातार दो क्लस्टर से PRP आशा साहू के खिलाफ शिकायत आने के बाद भी सब मे सिर्फ उन्हें ट्रांसफर का इनाम दिया जाता है अगर ऐसा नहीं करता विभाग तो PRP के साथ कई अधिकारी भी नप जाते लेकिन अधिकारी अपने आप को बचाने के चक्कर मे अब PRP को बचाने और उसे सुरक्षित करने के लिए एड़ी चोटी की जोर लगा देते है इस मामले भी सूत्र बताते है की जब PRP आशा साहू को विभाग ने नोटिस दिया और 3 दिवस के भीतर लिखित मे जवाब मांगा तो PRP आशा साहू ने अपनी लिखित मे उन अधिकारियो का नाम दे रहे थे जिसके कहने पर PRP ने लाखो रुपये समूह से कैश मे निकाल कर लाने को कहा था जैसे ही जवाब मे यह उन अधिकारियो का नाम शामिल हो रहा था तभी अपने विभाग के अधिकारियो को फसता देख मांडवाली का खेला शुरू हो गया सूत्र बताते है की PRP ने कहा की आपका नाम नहीं लूंगी अगर मुझे आप बर्खास्त नहीं करते तो वही अधिकारी ने भी साफ कहा की आपको सिर्फ ट्रांसफर करेंगे नाम न बताने की शर्त पर जानकारी दिया गया की इन दोनों की बीच विभाग ने ही मंडवाली कराया गया और फिर इस पैतरे से PRP का ट्रांसफर किया गया और बच गए PRP आशा साहू और अधिकारी?

​आशा साहू के खिलाफ दर्ज 5 प्रमुख जांच बिंदु

​प्रशासन द्वारा पीआरपी आशा साहू के खिलाफ 5 बिंदुओं पर जांच बैठाते हुए 3 दिवस के भीतर जवाब तलब किया गया था। इन बिंदुओं पर मिली शिकायतों ने योजना में चल रहे गंभीर घालमेल की पोल खोल दी है:
​प्रार्थना संकुल संगठन पवनी को गुमराह कर सामग्री क्रय करना:
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, संकुल संगठन के समस्त अभिलेख समूह के पदाधिकारियों व लेखापाल के पास होने चाहिए। आरोप है कि सेंट्रिंग और कार्यालयीन सामग्री के देयक आशा साहू द्वारा उपलब्ध कराए गए, जबकि कंप्यूटर सामग्री का देयक बिलाईगढ़ के बीपीएम संदीप तम्बोली द्वारा प्रस्तुत किया गया। बिना किसी पूर्व सत्यापन और समूह के पदाधिकारियों को अंधेरे में रखकर सामग्री को कार्यालय में डंप किया गया। प्रशासन ने तीनों देयकों की सामग्रियों का भौतिक सत्यापन कर पावती और उपयोगिता प्रमाण पत्र सौंपने के निर्देश दिए हैं।
​राशि भुगतान में भारी अनियमितता और 50,000 रुपये के गबन का अंदेशा:
उद्यमी ऋण रजिस्टर (दिनांक 03.05.2026) के अनुसार बेलहा ग्राम पंचायत के ग्राम संगठन को 1,30,000 रुपये जारी किया जाना पेंसिल से दर्ज पाया गया। वहीं, मौके पर गिरवानी की प्रगति ग्राम संगठन की महिलाओं ने बयान दिया कि उन्हें केवल 80,000 रुपये ही मिले हैं। पूछताछ के दौरान आशा साहू द्वारा मौके पर मौखिक रूप से यह स्वीकार करने की बात सामने आई कि 50,000 रुपये उनके पास हैं, जिसे लिखित बयानों में छुपाया गया। कम पढ़ी-लिखी ग्रामीण महिलाओं को गुमराह कर की गई यह राशि स्पष्ट रूप से वसूली योग्य वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आती है। जिला स्तर के नाम पर अवैध वसूली की सुगबुगाहट
कलस्टर की लेखापाल मुकेश्वरी बंजारे के बयानों और प्रस्तुत व्हाट्सएप चैट, ऑडियो-वीडियो क्लिप के अनुसार, प्रशिक्षण के नाम पर 10 लाख रुपये नगद जिले में भिजवाने के लिए बार-बार दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि आरोपी पीआरपी ने इससे इंकार किया है, लेकिन जिला स्तर पर किस अधिकारी के नाम पर यह पैसे मांगे जा रहे थे, इसका खुलासा न होने से कलस्टर की महिलाओं को गुमराह कर अवैध वसूली करने का गंभीर संदेह गहरा गया है।
​संकुल संगठन की राशि का निजी उपयोग:
प्रार्थना संकुल संगठन पवनी से कार्यालय किराए के नाम पर प्रति माह 5,500 रुपये का भुगतान कराया जा रहा है, जबकि आरोप है कि उस कार्यालय के आधे हिस्से में पीआरपी आशा साहू खुद निवास कर रही हैं। इस प्रकार समूह को गुमराह कर संस्थागत फंड का निजी उपयोग किए जाने का मामला भी जांच के दायरे में है।
​स्वेच्छाचारिता और पूर्व का संलिप्त इतिहास:
इससे पहले गोडम कलस्टर में पदस्थापना के दौरान भी पीआरपी पर वित्तीय अनियमितता बरतने के आरोप लगे थे। तब अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर केवल उनका ट्रांसफर गोडम से पवनी कलस्टर कर दिया गया था, जिसके बाद भी उनके आचरण में कोई सुधार नहीं देखा गया।

​बड़ा सवाल: सिर्फ ट्रांसफर क्यों, कार्रवाई कब?

​जब गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों और गबन के आरोपों के तहत 3 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था, तो अचानक बिना किसी स्पष्ट निष्कर्ष के ट्रांसफर आदेश जारी कर मामले को शांत करने का प्रयास क्यों किया गया? जबकि एक बार नहीं दो बार PRP आशा साहू ने क्लस्टर मे अनियमितता का आरोप लगा और बकयदा नोटिस मे भी जिक्र किया गया जिसमे साफ कहा की आपने पहले भी इस तरह का कृत्य को अंजाम दे चुके है ऐसे मे एक निष्पक्ष जाँच होना बेहद जरूरी था और जाँच के साथ के ठोस कार्यवाही लेकिन PRP आशा साहू को पवनी क्लस्टर से हटा कर कांदुलपाली क्लस्टर उनका बस ट्रांसफर कर दिया गया और मामला को साफ तरीके से दबा दिया गया जबकि अंदुरुनी तरीके से बिहान योजना के नाम पर करोड़ों के बजट को कागजों में खपाने वाले और जमीन पर महिलाओं को कर्ज के दलदल में धकेलने का काम किया जा रहा और ऐसे उच्चाधिकारियों पर कब गाज गिरेगी?
​सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के जागरूक नागरिकों और पीड़ित महिलाओं की निगाहें अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, या फिर भ्रष्टाचार की फाइलें हमेशा की तरह फाइलों में ही दफन होकर रह जाएंगी।