July 15, 2026

जिला सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, नौकरी पक्की करने और धान खरीदी प्रभारी बनाने के नाम पर लाखों की रिश्वत का खेल!

खबर शेयर करें

बिलासपुर अपैक्स बैंक अध्यक्ष से लिखित शिकायत; डभरा और चंद्रपुर शाखा में वित्तीय गड़बड़ियों और दलालों के जरिए वसूली का पर्दाफाश करने की मांग।

सक्ती/चंद्रपुर।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बिलासपुर के अंतर्गत आने वाले सक्ती क्षेत्र में एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जिला सक्ती के नोडल अधिकारी अश्विनी पाण्डेय पर अपनी पदस्थापना का दुरुपयोग करते हुए कर्मचारियों के शोषण, नौकरी नियमितीकरण (रेगुलर) करने के नाम पर लाखों की रिश्वत लेने और धान खरीदी प्रभारी बनाने के लिए मोटी रकम वसूलने के गंभीर आरोप लगे हैं।
चंद्रपुर निवासी पीड़ित कर्मचारी पीतांबर निषाद ने इस संबंध में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, बिलासपुर के अध्यक्ष को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और एफआईआर (FIR) दर्ज कराने और निम्नलिखित मांग की है।


1: नौकरी रेगुलर करने के नाम पर ऐंठे 5 लाख रुपये शिकायतकर्ता पीतांबर निषाद का आरोप है कि नोडल अधिकारी अश्विनी पाण्डेय ने वर्ष 2021 में उसकी नौकरी को रेगुलर (नियमित) करने के एवज में 5 लाख रुपये नगद रिश्वत ली थी।
आज दिनांक तक न तो नौकरी रेगुलर की गई और न ही पैसे वापस किए गए।पीड़ित द्वारा जब अपने पैसे वापस मांगे गए, तो उसे नौकरी से निकालने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जाने लगीं, जिसके कारण पीड़ित लंबे समय तक खामोश रहा।
2: धान खरीदी प्रभारी बनाने के लिए भी 5 लाख की डिमांड शिकायत पत्र के अनुसार, नोडल अधिकारी द्वारा धान खरीदी केंद्रों में ‘प्रभारी’ की मलाईदार कुर्सी सौंपने के लिए भी खुली बोली लगाई जा रही थी।
“मुझसे धान खरीदी प्रभारी बनाने के लिए दोबारा 5 लाख रुपये की मांग की गई थी। पैसे नहीं देने पर मुझे प्रभारी नहीं बनाया गया और चंद्रपुर उपार्जन केंद्र में नियमों को ताक पर रखकर किसी अन्य को यहजिम्मेदारी सौंप दी गई।
3: डभरा और चंद्रपुर शाखाओं को बनाया ‘निशाना’शिकायत में यह भी खुलासा किया गया है कि नोडल अधिकारी द्वारा डभरा और चंद्रपुर बैंक शाखाओं को विशेष रूप से निशाने पर लिया गया है।इन शाखाओं के अंतर्गत आने वाली समितियों के सेविंग खातों से वेतन की राशि से अधिक का आहरण अन्य मदों व निजी खर्चों के लिए किया जा रहा है।खास बात यह है कि इस आहरित राशि के संबंध में बैंक के पास न तो कोई वैध बिल-वाउचर उपलब्ध है और न ही कोई पावती। इससे कर्मचारियों को एक-एक महीने के वेतन के लिए तरसना पड़ रहा है।

गंभीर आरोपों का शिकायतकर्ता ने खुलासा किया बताया ड्राइवर और दलालों के खातों में ली जाती है रिश्वत की रकम ,नोडल अधिकारी सीधे अपने हाथ गंदे नहीं करते। भ्रष्टाचार का मनोबल इतना बढ़ चुका है कि रिश्वत की रकम सीधे नोडल अधिकारी के खुद के बैंक खाते और उनके प्राइवेट ड्राइवर के खाते में भी ट्रांसफर करवाई जाती है।
शिकायतकर्ता को झूठे केस में फंसाने की साजिश का डर
पीतांबर निषाद ने आशंका जताई है कि इस गंभीर शिकायत के बाद अधिकारी और उनके रसूखदार साथी मिलकर उन्हें झूठे कैश गबन या किसी अन्य फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेजने की साजिश रच सकते हैं। पीड़ित ने अपनी सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है।