August 23, 2026

स्वतंत्रता का शक्तिशाली महामंत्र है वन्दे मातरम्: चूड़ामणि पटेल

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सारंगढ़ बिलाईगढ़ -अंग्रेजों के शासनकाल में जिस गीत ने भारत को एकजुट करने में बड़ी भूमिका निभाई, वही गीत आज आजाद भारत में राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है।कांग्रेस मुख्यालय में 15 अगस्त को वंदे मातरम् गाने का वीडियो वायरल होने के बाद राष्ट्रीय गीत पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने है।हाल ही में खत्म हुए संसद के मानसून सत्र में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित किया गया. सरकार ने पहली बार वंदे मातरम् के पूरे गीत को गाने के आधिकारिक नियम जारी किए. गीत में बाधा डालने या उसका अपमान करने पर सजा का प्रावधान किया है।
मातृभूमि की प्रशंसा में लिखे गए ‘वंदे मातरम्’ गीत ने अपने 50 वर्ष पूरे किए तो भारत अंग्रेजी शासन के अधीन था। जब सौ वर्ष पूरे हुए तो देश में आपातकाल था। आज 150 वर्ष पूरे हुए हैं तो उसका पूर्ण स्वर और सम्मान लौटाने का अवसर है।लेकिन कांग्रेस ने 89 साल पहले मुस्लिम वोटों के लिए वंदे मातरम् के कुछ हिस्से हटाए थे और आज भी वही कर रही है। इस तरह इतिहास से जुड़ा पुराना विवाद आज की राजनीति में फिर लौट आया है।19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति यानी सीडब्ल्यूसी ने 1937 के अपने प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करते हुए फैसला किया है कि भविष्य में कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे ही गाए या बजाए जाएंगे बाकी चार पदों को धर्मनिरपेक्षता विरोधी करार देते हुए विरोध किया है जिस पर सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी चूड़ामणि पटेल ने कड़ी निंदा और स्पष्ट शब्दों में विरोध किया है।उन्होंने इसे राष्ट्रगीत का अपमान और तुष्टीकरण की राजनीति बताते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति का कोई प्रस्ताव भारत के संवैधानिक संस्थानों और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।
श्री पटेल ने कांग्रेस पार्टी को महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन का स्मरण करने को कहा है जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् को “साम्राज्यवाद-विरोधी नारा” और “शुद्धतम राष्ट्रीय भावना” से जुड़ा हुआ बताया था।अतः कांग्रेस को कुंठा से बाहर आएं और अपनी राजनीतिक फायदे और वोट बैंक के दबाव में आकर राष्ट्रीय गीत की गरिमा और विरासत को अपमानित करने का दुस्साहस ना करें।
चूड़ामणि पटेल ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी स्वतंत्रता, बलिदान और राष्ट्रगौरव के मंत्र राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् को सांप्रदायिक दबाव,राजनीतिक तुष्टिकरण अथवा संकीर्ण वोटबैंक की राजनीति के अधीन करने के कांग्रेस की हर प्रयास का विरोध करेगी।उन्होंने बताया कि 1947 में भारत की स्वतंत्रता का जयघोष ‘वंदे मातरम्’ था और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2047 के ‘विकसित भारत’ का महाघोष भी ‘वंदे मातरम्’ ही होगा।