महासमुंद : गोपाल लहरिया
छत्तीसगढ़ प्रदेश की पारंपरिक त्यौवहार हरेली आज महासमुंद जिले में हर्षों-उल्लास से मनाया जा रहा हैl
सरायपाली विधान सभा अंतर्गत आने वाले ग्राम कापुडीह में हर्षों-उल्लास से मनाया गया हरेली त्यौवहार l
हरेली त्यौवहार हरियाली का प्रतीक माना जाता है,किसान अपनी फसल की सुरक्षा की कामना करते हुए हरेली त्यौवहार मनाते हैं।
जब किसान आषाढ़ के महीने में अपने खेत में फसल उगाते है तो श्रावण महीने के आते तक धान की फसल हरा-भरा हो जाता है तब किसान अपनी फसल की सुरक्षा हेतु हरेली त्यौवहार मनाते हैं।
हरेली त्यौवहार छत्तीसगढ़ का प्रमुख त्योवहार है जो मुख्यतः खेती-किसानी से जुड़ा होता है और हरेली का मतलब होता है “हरियाली”जो हर वर्ष सावन माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन मनाया जाता है इसे“हरियाली अमावस्या” के नाम से भी जाना जाता है l
छत्तीसगढ़ के किसान हरेली त्यौवहार में खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले अपने औजारों और गायों की पूजा करते हैं ।
यह हरेली त्यौवहार प्रकृति पर आधारित है और हरेली त्यौवहार में छत्तीसगढ़ के लोगों द्वारा की जाने वाली मूल प्रार्थना अच्छी फसल की कामना करते है और
हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग पूर्ण हो जाता है।
इस त्यौहार में माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं,कृषि औजारों को धोकर,धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल व गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है।
हर घर के प्रमुख व्यक्ति द्वारा अपने-अपने घरों में अपने ईष्ट देव की पूजा-अर्चना कर उनको नारियल अर्पण किया जाता है और साथ ही साथ गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और गांव की खुशहाली की मांग कर उनको नारियल अर्पण किया जाता है।








More Stories
रिश्तों की अनूठी मिसाल अस्पताल में नाना की सेवा में जुटे मासूम बबु और सोमू
जनता से अपील पहचान मिले तो सारंगढ़ पुलिस को दे सुचना
शादी की सालगिरह के दिन हुआ हादसा, परिवार सदमे में