बालोद। ग्राम तुएंगोंदी पटेश्वरधाम मामले में कथित अवैध कब्जे और वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज का आंदोलन सोमवार को उग्र रूप लेता दिखाई दिया। हजारों की संख्या में पहुंचे समाज के लोगों ने जिला कलेक्टोरेट का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ते हुए कलेक्टोरेट परिसर में प्रवेश कर दिया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पहली बार वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच देर शाम तक वार्ता का दौर चलता रहा।
आदिवासी समाज का आरोप है कि पटेश्वरधाम क्षेत्र में अवैध निर्माण और कब्जे को लेकर वर्ष 2020 में शिकायत एवं आवेदन दिए गए थे, लेकिन छह वर्षों बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि लगातार ज्ञापन, धरना और चेतावनी के बावजूद प्रशासन द्वारा प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने से समाज के लोगों में भारी आक्रोश है।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिला-पुरुष कलेक्टोरेट पहुंचे। मुख्य द्वार पर पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार कर परिसर के अंदर पहुंच गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। जिसमें आदिवासी समाज के लोगों को चोटे आई साथ ही पुलिस बल के लोगों का भी चोटे आई कुछ महिला पुलिस कर्मी के पैरों में चोटे लगी |
आंदोलनकारियों ने कलेक्टोरेट परिसर में ही धरना शुरू कर दिया और अपनी मांगों के समर्थन में वहीं भोजन बनाने के लिए चूल्हा जला दिया। समाज के लोगों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पूरे दिन परिसर में नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन चलता रहा।
सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने प्रशासन पर आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि पटेश्वरधाम से जुड़े मामले में पारदर्शी जांच और अवैध निर्माण पर कार्रवाई की जाए। समाज ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।

शाम करीब छह बजे जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, जिला पंचायत और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से चर्चा की। वार्ता के दौरान अधिकारियों ने समाज की मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से समाप्त किया गया, हालांकि समाज ने स्पष्ट कर दिया कि प्रशासनिक कार्रवाई की प्रगति पर उनकी नजर बनी रहेगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। पटेश्वरधाम विवाद अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि आदिवासी समाज के आस्था से जुड़ा हुआ साथ ही अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है। यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।








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