बिलाईगढ़ नगर पंचायत और विवादों का गहरा नाता है यही कारण है की नगर पंचायत बिलाईगढ़ आए दिन अखबार की सुर्खियों में छाया रहता है कभी अवैध उगाही के नाम पर तो कभी भ्रष्टाचार के नाम पर। वैसे तो नगर में किसी भी प्रकार का विकास कार्य कोसों दूर है। जितना विकास है उससे ज्यादा का भ्रष्टाचार ऐसे ही भ्रष्टाचार का मामला आए दिन होते रहता है

एक बार फिर नगर बिलाईगढ़ विवादों में है जिसका मुख्य कारण विवादास्पद सीएमओ सुशील कुमार चौधरी हैं सीएमओ पर आरोप है कि जिनके द्वारा विगत 8 10 वर्षों से कार्यरत स्वच्छता दीदियों का अनुबंध समाप्ति का हवाला देकर बिना सूचना के कार्य से पृथक कर दिया गया। वही दूसरे महिलाओं को उक्त कार्य पर लगा दिया गया जिसका कोई प्रस्ताव नहीं है यहां तक की महिलाओं को अपने समूह का नाम तक मालूम नहीं कभी आठ कभी 10 तो कभी 15 महिलाओं का समूह है कहते हैं जबकि उपस्थित आठ लोगों का ही रहता है वह भी सुबह 7:00 से 9:00 बजे तक कार्य कर घर चले जाते हैं उनके द्वारा विधिवत सूखा कचरा गीला कचरा छटनी करने के बजाय रैनी भाटा स्थित पानी टंकी एवं शुक्रवारी बाजार के पास खुला फेंक दिया जाता है जिससे बीमारी फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उक्त महिलाओं को कंपोस्ट शेड में कंपोस्ट खाद बनाने की कोई जानकारी ही नहीं है

कंपोस्ट शेड एवं मणिकंचन केंद्र में विगत 6–7 माह से ताला लटका हुआ है जिससे रिक्शा एवं ई रिक्शा के अलावा लाखों रुपए का बेलिंग,फटका, गो कास्ट एवं ऑर्गेनिक कम्पोस्टिंग मशीन कबाड़ की तरह सड़ रहा है बर्बाद हो रहा है। महिला समूह द्वारा घर-घर कचरा कलेक्शन हेतु कई वार्डों में जाना भी जरूरी नहीं समझती वही ई रिक्शा वह हाथ रिक्शा बरसात में पूरी तरह कबाड़ हो चुके हैं कोई रखरखाव या उपयोग नहीं होने से उपयोगहीन होते जा रहे हैं एवं शासन को लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है जिसका एकमात्र कारण नगर पंचायत के सबसे विवादास्पद मुख्य नगर पालिका अधिकारी सुशील कुमार चौधरी हैं। उनके द्वारा नगर विकास में कोई रुचि नहीं ली जा रही है। एवं कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों के साथ सिर्फ राजनीति की जा रही है जो निर्वाचन के दौरान अपने चहेते लोगों के निर्वाचित नहीं होने का दुष्परिणाम है। अपने स्वयं के निवास से ही समस्त फाइलों दस्तावेजों को लाकर कार्यालय बना लिया गया है।

एवं कर्मचारियों को आए दिन कोई टाइम नहीं होता मीटिंग है कहकर कभी कुछ कह कर बुलाया जाता है एवं प्रताड़ित किया जाता है जबकि जनहित के कार्यों में उनके द्वारा या सफाई व्यवस्था में उनके द्वारा कोई रुचि नहीं लिया जाता नगर पंचायत कार्यालय के चारों ओर बड़े-बड़े घास इत्यादि से आए दिन सांप बिच्छू विचरण कर रहे हैं कभी भी अप्रिय घटना घटित हो सकती है। सुशील चौधरी निर्वाचन के बाद से ही नगर पंचायत आना बंद कर दिए समस्त फाइलें दस्तावेज अपने निवास में ही लाकर कार्य करते हैं किसी से सीधे मुंह बात करना भी पसंद नहीं करते शासन का स्पष्ट निर्देश है

कि बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़े लेकिन वह मुख्यालय से हमेशा गायब रहते है। अपने निवास पर ही निष्ठा ऐप में अटेंडेंस अपलोड कर कार्य का इति श्री कर लेते हैं। उच्च अधिकारी भी कुंभ करनी निंद्रा में सोए हुए हैं जिनका वरद हस्त उनको प्राप्त है। तभी तो इतने बेफिक्र होकर हफ्ते हफ्ते गायब रहते हैं कोई भी कार्यवाही नहीं होना यही दर्शाता है। ऊपर से कहते फिरते हैं कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता इस संबंध में नगर वासियों जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों के द्वारा लिखित शिकायत भी की जा चुकी है किंतु कोई भी कार्यवाही नहीं होना कई संदेहों को जन्म देता है। जिससे नगर में दिनों दिन आक्रोश बढ़ता जा रहा है जो कभी भी खतरनाक एवं अप्रिय घटना का कारण बन सकता है शासन प्रशासन को शीघ्र ही इस विषय में जांच एवं कार्यवाही करने की आवश्यकता है।


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