May 1, 2026

बालोद की शैक्षणिक साख पर बड़ा धक्का: 10 साल में पहली बार टॉप-10 से पूरी तरह बाहर

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10वीं-12वीं दोनों बोर्ड परीक्षा में जिला नदारद, रैंकिंग में भी पिछड़ा बालोद

बालोद जिले की शिक्षा व्यवस्था को इस वर्ष बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में 10 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ कि जिले का एक भी छात्र-छात्रा राज्य की टॉप-10 मेरिट सूची में स्थान नहीं बना सका।

जहां हर वर्ष जिले के विद्यार्थी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर बालोद का नाम रोशन करते थे, वहीं इस बार न केवल मेरिट सूची से जिला गायब रहा, बल्कि राज्य स्तरीय रैंकिंग में भी पिछड़ गया। इससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

राज्य में बालोद जिले की स्थिति

10वीं बोर्ड परीक्षा में बालोद जिला प्रदेश में 29वें स्थान पर रहा।

12वीं बोर्ड परीक्षा में बालोद जिला प्रदेश में 30वें स्थान पर पहुंच गया।

यह स्थिति बताती है कि जिले की शैक्षणिक गुणवत्ता लगातार गिर रही है।

10वीं बोर्ड परीक्षा के आंकड़े

कुल परीक्षार्थी: 10,426

उत्तीर्ण छात्र: 6,867

अनुत्तीर्ण छात्र: 2,520

परिणाम प्रतिशत: लगभग 65.94%

12वीं बोर्ड परीक्षा के आंकड़े

कुल परीक्षार्थी: 8,745

उत्तीर्ण छात्र: 6,800

अनुत्तीर्ण छात्र: 819

परिणाम प्रतिशत: लगभग 77.79%

शिक्षा विभाग पर उठे सवाल

क्या स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई नहीं हो रही?

क्या विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन नहीं मिला?

क्या विभाग केवल बैठकों और कागजी योजनाओं तक सीमित रहा?

क्या ग्रामीण स्कूलों की लगातार अनदेखी की गई?

क्या अधिकारियों की निगरानी कमजोर रही?

अगर जिले की शिक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो हजारों विद्यार्थियों में से कोई न कोई छात्र राज्य की मेरिट सूची में जरूर जगह बनाता।

जिम्मेदारी कौन लेगा?

जब अच्छे परिणाम आते हैं तो अधिकारी श्रेय लेने आगे आ जाते हैं, लेकिन अब जब जिले की स्थिति बिगड़ी है तो जिम्मेदारी कौन तय करेगा? क्या जिला शिक्षा विभाग समीक्षा करेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?

छात्रों का भविष्य दांव पर

बालोद जैसे उभरते जिले में शिक्षा स्तर का गिरना गंभीर चिंता का विषय है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में जिले की पहचान और कमजोर हो सकती है।

जनता की मांग

जिले के अभिभावकों, शिक्षाविदों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि कमजोर स्कूलों की पहचान कर विशेष अभियान चलाया जाए, शिक्षकों की जवाबदेही तय हो और विद्यार्थियों के लिए बेहतर मार्गदर्शन व्यवस्था बनाई जाए।

बालोद का टॉप-10 से बाहर होना केवल एक खबर नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग के लिए खतरे की घंटी है। अब सुधार नहीं हुआ तो जिले की शैक्षणिक साख पर और बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।