July 19, 2026

दवाओं के अपशिष्ट और इस्तेमाल की गई नीडल्स का खुले में अवैध निपटान, पर्यावरण व जनस्वास्थ्य पर मंडराया गंभीर खतरा

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बसना/सागरपाली : खबर निरीक्षण

बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम सागरपाली से लगभग एक किलोमीटर दूर कापूडीह स्थित पीपल पेड़(हनुमान मंदिर)के समीप एक छोटे तालाब में कथित रूप से बायोमेडिकल कचरा फेंके जाने का मामला सामने आया है। निरीक्षण के दौरान तालाब और उसके आसपास दवाइयों के खाली रैपर,दवा की शीशियां,इस्तेमाल की गई नीडल्स तथा अन्य मेडिकल अपशिष्ट पड़े होने की जानकारी मिली।
यदि यह सामग्री वास्तव में किसी निजी क्लीनिक या स्वास्थ्य केंद्र से संबंधित है,तो यह बायोमेडिकल अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के गंभीर उल्लंघन की ओर संकेत करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे स्थित इस छोटे तालाब में समय-समय पर मेडिकल कचरा फेंका जाता है। बरसात के मौसम में तालाब में पानी भरा होने के कारण यह अपशिष्ट पानी के साथ आसपास के क्षेत्र में फैल सकता है,जिससे मिट्टी और जल स्रोतों के प्रदूषित होने की आशंका बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार,मेडिकल अपशिष्ट में संक्रमित सामग्री,हानिकारक रसायन तथा रोगजनक सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं।
इस्तेमाल की गई नीडल्स और अन्य संक्रमित सामग्री खुले में पड़े रहने से आम नागरिकों,बच्चों, पशुओं तथा सफाई कर्मियों के लिए संक्रमण का खतरा उत्पन्न हो सकता है,यदि ऐसे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया जाए तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है।
गौरतलब है कि बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स,2016 के तहत प्रत्येक अस्पताल,नर्सिंग होम,पैथोलॉजी लैब,क्लीनिक एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए बायोमेडिकल कचरे का पृथक्करण,संग्रहण,परिवहन और अधिकृत एजेंसी के माध्यम से सुरक्षित निपटान अनिवार्य किया गया है।
इसके बावजूद यदि कोई संस्था मेडिकल कचरे को खुले में या सार्वजनिक स्थानों पर फेंकती है,तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाता है और संबंधित प्राधिकरण द्वारा कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है एवं उनका कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में पर्यावरण प्रदूषण और संक्रामक रोगों का खतरा और बढ़ सकता है।

चिकित्सा अधिकारी का पक्ष

इस संबंध में बसना विकास खण्ड चिकित्सा अधिकारी नारायण सहू(BMO)से दूरभाष पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी मिलने पर संबंधित क्षेत्र के निजी क्लीनिकों को नोटिस जारी किया जाएगा,साथ ही साथ पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी संस्था द्वारा बायोमेडिकल कचरे का नियमों के विपरीत निपटान किया जाना पाया गया तो नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।