July 19, 2026

राम मंदिर चंदे व चढ़ावे में ‘लूट’ का आरोप, कांग्रेस ने उठाए मोदी-शाह पर सवाल

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​सारंगढ़ बिलाईगढ़ टारजन महेश (समय दर्शन)छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। 18 जुलाई शनिवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित किया गया जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में अनिल शुक्ला (पूर्व जिला अध्यक्ष रायगढ़ ) पत्रकार वार्ता को संबोधित किया कहा भगवान राम के नाम पर देश भर से जुटाया गया करोड़ों का चंदा और चढ़ावा ‘भाजपा-आरएसएस की राजनीतिक लूट’ का शिकार हो गया है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग की है।
​’आस्था के नाम पर राजनीति और चढ़ावे पर लूट’ ​कांग्रेस ने बड़ा आरोप लगाया मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। देश के कोने-कोने से गरीब, किसान, मजदूर, महिलाओं और श्रद्धालुओं ने अपनी मेहनत की कमाई से राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था। शुक्ला ने कहा भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने तीन दशकों तक राम के नाम पर चंदा एकत्र किया और इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता प्राप्त की। लेकिन आज करोड़ों रामभक्त यह पूछने को मजबूर हैं कि यह चंदा और चढ़ावा आखिर किसके संरक्षण में लूटा गया?

​14,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप -भाजपा पर राम मंदिर निर्माण के समय ‘रामशिला पूजन’ के नाम से 14,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि एकत्रित करने का दावा किया गया था, जिसका जवाब भाजपा और आरएसएस के लोग नहीं दे पाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पहले चंदे में हेराफेरी की गई और अब मंदिर बनने के बाद चढ़ावे में भी चोरी की जा रही है।
​”चूँकि राम मंदिर न्यास ट्रस्ट का गठन गृहमंत्री अमित शाह ने किया था और यह प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, इसलिए इस कथित घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की बनती है
कांग्रेस कमेटी ​द्वारा उठाए गए ‘तीन बड़े सवाल’
​कांग्रेस ने केंद्र सरकार से जवाब मांगते हुए तीन प्रमुख सवाल दागे हैं:
​जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, तो इस घोटाले की जवाबदेही कौन लेगा?​अगर सब कुछ ठीक था, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए?​अगर कुछ गलत नहीं हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है?
​पार्टी की मुख्य मांगें
​कांग्रेस ने इस मामले में निम्नलिखित 5 सूत्रीय मांगें सामने रखी हैं:
​प्रधानमंत्री की जवाबदेही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सामने स्पष्ट करें कि ट्रस्ट के गठन, शीर्ष नियुक्तियों और प्रशासनिक निगरानी में सरकार की क्या भूमिका रही है।
​तत्काल गिरफ्तारी कथित घोटाले में शामिल चंपत राय, अनिल मिश्रा और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की जाए।​सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच: पूरे प्रकरण की सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए।
​ट्रस्ट को भंग करना: वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों और प्रशासनिक विशेषज्ञों के साथ एक नया, पारदर्शी ट्रस्ट गठित किया जाए।
​फोरेंसिक ऑडिट: राम मंदिर के लिए प्राप्त समस्त चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद और आयोजनों के व्यय का स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
​अनिल शुक्ला ने अंत में कहा कि भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं और राम के नाम पर जुटाए गए धन की कथित लूट करोड़ों भारतीयों की धार्मिक चेतना का अपमान है। आस्था पर डाका डालने वालों को बेनकाब कर कानून के कठघरे में खड़ा किया जाना बेहद आवश्यक है।

पत्रकार वार्ता में रहे मौजूद जिलाध्यक्ष ताराचंद देवांगन, संजय दुबे,सूरज तिवारी,अरूण मालाकार,नीतिश बंजारे, उमेश केशरवानी,रवीन्द्र नंदे, राधेश्याम जायसवाल ,विनोद भारद्वाज,रामनाथ सिदार,रमेश खुंटे,राकेश पटेल, हेमंत, मितेंद्र यादव,राजू यादव,राजकमल अग्रवाल इत्यादि उपस्थित रहे।