July 21, 2026

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में पीडीएस वितरण पर सवाल: ग्रामीण दुकानों का स्टॉक कट रहा, शहरी दुकानों को मिल रहा अतिरिक्त आवंटन?,,,जमकर हो रही धांधली

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सारंगढ़ – सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के संचालन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि खाद्य विभाग द्वारा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की उचित मूल्य दुकानों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है। शहरी और ग्रामीण मे भारी भेदभाव नजर आ रहा

ग्रामीण सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार, सारंगढ़ विकासखंड में संचालित सैकड़ों उचित मूल्य दुकानों का संचालन और आवंटन एक ही विभाग, यानी खाद्य विभाग के माध्यम से किया जाता है। बावजूद इसके, ग्रामीण और शहरी दुकानों के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जाने की शिकायत सामने आ रही है।नाम न बताने के शर्त पर बताया गया की ग्रामीण क्षेत्रों के उचित मूल्य दुकान संचालकों का कहना है कि यदि किसी दुकान में पिछले माह का चावल शेष रह जाता है,या उससे पहले के स्टॉक हो तो अगले माह के आवंटन से उतनी मात्रा काट दी जाती है। इतना ही नहीं, अतिरिक्त चावल की मांग करने पर भी विभाग यह कहकर मना कर देता है कि ऊपर से स्टॉक कटौती के निर्देश हैं।

वहीं दूसरी ओर, आरोप है कि शहरी क्षेत्रों की कई उचित मूल्य दुकानों में शेष स्टॉक होने के बावजूद न केवल उनकी कटौती नहीं की जा रही, बल्कि उन्हें अतिरिक्त चावल का आवंटन भी किया जा रहा है। इससे ग्रामीण दुकान संचालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और सवाल उठ रहे की आखिर शहरी और ग्रामीण मे ये भेदभाव क्यों

सवाल यह उठता है कि जब पूरे जिले में पीडीएस व्यवस्था एक ही विभाग के अधीन संचालित होती है और नियम सभी के लिए समान हैं, तो फिर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग व्यवस्था क्यों अपनाई जा रही है? इसे साफ तरीके से भेदभाव कहा जा सकता है यदि शहरी दुकानों को अतिरिक्त आवंटन मिल सकता है, तो ग्रामीण दुकानों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है? और अगर नियम नहीं तो फिर कुछे शहरी दुकानों के लिए ये मेहराबानी क्यों?

ग्रामीण क्षेत्र के दुकान संचालकों का कहना है कि इस दोहरे रवैये से उन्हें आर्थिक और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि विभाग की इस नीति से ग्रामीण क्षेत्रों के हित प्रभावित हो रहे हैं।

अब देखना होगा कि खाद्य विभाग इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है। यदि वास्तव में आवंटन में भेदभाव किया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि कोई प्रशासनिक या तकनीकी कारण है, तो उसे भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना आवश्यक है, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके आगे हमारी पड़ताल जारी है भाग 2 मे आपको कुछ ग्रामीण और शहरी दुकानो की सूची जारी कर इस पुरे खेल की काली परत खोलेंगे