सारंगढ़। देश में वर्तमान राजनीतिक स्थितियों को लेकर आज आम नागरिक के मन में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या देश में लोकतंत्र बचा है या तानाशाही कायम हो चुकी है। यह सवाल तब और गहरा गया जब जनता की आवाज़ बनकर सड़क पर उतरे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को पुलिस प्रशासन द्वारा हिरासत में ले लिया गया। इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सदस्य बिनोद भारद्वाज ने सरकार की इस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है।
बिनोद भारद्वाज ने अपने बयान में कहा कि राहुल गांधी केवल एक राजनीतिक दल के नेता नहीं हैं, बल्कि वे देश के लाखों युवाओं, किसानों, बेरोजगारों और महिलाओं की पीड़ा को संसद से लेकर सड़क तक पूरी मजबूती से उठाते आए हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि जब-जब देश में पेपर लीक के मामले सामने आए, महंगाई चरम पर पहुंची या संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला हुआ, तब-तब राहुल गांधी जंतर-मंतर, भारत जोड़ो यात्रा और संसद भवन में निडर होकर सबसे आगे खड़े दिखे हैं।
सरकार पर निशाना साधते हुए भारद्वाज ने कहा कि सत्ता में बैठी सरकार को सच सुनना बिल्कुल गंवारा नहीं है। अपने अधिकारों और जनता की समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिस तरह पुलिस हिरासत में लिया गया, वह स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि सरकार लोकतांत्रिक आलोचनाओं और जनता के आक्रोश से पूरी तरह डर गई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जब सरकारें सच का सामना करने से घबराने लगती हैं, तो वे विपक्ष और जनता की आवाज़ को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासनिक बल का सहारा लेती हैं, जो कि लोकतंत्र के मूल ढांचे पर सीधा प्रहार है। राहुल गांधी की गिरफ्तारी के बाद से ही देशभर में कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखा जा रहा है और विभिन्न मंचों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए लगातार आवाज़ बुलंद की जा रही है।








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जंतर-मंतर की सड़कों पर लोकतंत्र हुआ लहूलुहान – बिनोद भारद्वाज