September 14, 2026

छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी अधिकार दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम पर आदिवासी अधिकार घोषणा पत्र के 19वें वर्षगांठ पर अधिकारों पर चर्चा हुई

रायपुर, 13 सितंबर 2026।विश्व आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में…

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रायपुर, 13 सितंबर 2026।
विश्व आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर में आयोजित हुआ, जिसमें आदिवासी अधिकारों, संवैधानिक प्रावधानों तथा वर्तमान समय में आदिवासी समाज के समक्ष मौजूद विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र द्वारा आदिवासी अधिकारों की घोषणा  रही। 13 सितंबर 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा को अंगीकृत किए जाने की 19वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह आयोजन किया गया।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न आदिवासी संगठनों की संयुक्त पहल से आदिवासी समुदायों, शोधार्थियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विषय में रुचि रखने वाले नागरिकों को आमंत्रित किया गया।

इन महत्वपूर्ण विषयों पर हुई चर्चा कार्यक्रम में आदिवासी समाज से जुड़े कई समसामयिक एवं महत्वपूर्ण विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा गया। इनमें प्रमुख रूप से- की समझ और उसका महत्व व ग्रामीण स्तर तक पहुंच पर चर्चा

समान नागरिक संहिता छत्तीसगढ़ राज्य में लागू न होने पर एक स्वर सहमति

जनगणना के बाद परिसीमन में आदिवासी क्षेत्रों में आरक्षण सीटों पर होने वाले दुष्प्रभाव

विस्थापन एवं पुनर्वास से जनगणना पर प्रभाव

वन ग्राम से राजस्व ग्राम में परिवर्तन व‌ वर्तमान समय में राजस्व ग्राम में रोफरा नियम से ग्राम समिति अध्यक्ष व प्रमुखो द्वारा अनुभव साझा किया गया

ग्राम सभा एवं पंचायतों द्वारा टैक्स वसूली

भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता एवं न्याय

संयुक्त राष्ट्र आदिवासी अधिकार घोषणा-पत्र पर विस्तृत चर्चा

आदिवासी अधिकारों और भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ जल, जंगल, जमीन, संस्कृति, परंपरा, स्वशासन और निर्णय प्रक्रिया में आदिवासी समुदायों की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद को मजबूत करना रहा।आदिवासी अधिकार केवल सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषय नहीं हैं, बल्कि भूमि, प्राकृतिक संसाधनों, ग्राम सभा की भूमिका, विकास परियोजनाओं से प्रभावित समुदायों के अधिकार तथा सम्मानजनक पुनर्वास जैसे विषयों से भी सीधे जुड़े हुए हैं।कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधानों और अंतरराष्ट्रीय घोषणाओं की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने तथा समुदायों के बीच जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।