October 13, 2026

तबीयत खराब होने से स्कूल नहीं जा सका छात्र, अब नाम काटने का नोटिस मिलने से उठे सवाल

खबर शेयर करें

पालक का आरोप—स्वस्थ होने के बाद स्कूल पहुंचने पर भी नहीं दी गई उपस्थिति,

तीन-चार अन्य विद्यार्थियों को भी नोटिस जारी करने की बात

महासमुंद गेंददास मानिकपुरी (खबर निरीक्षण)जिले के बिछिया स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 9वीं के एक छात्र को लगातार अनुपस्थित रहने के कारण नाम काटने का नोटिस जारी किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में छात्र के पालक ने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उनका बेटा तबीयत खराब होने के कारण स्कूल नहीं जा पा रहा था। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वह विद्यालय पहुंचा, लेकिन इसके बावजूद उसकी उपस्थिति दर्ज नहीं की गई।

पालक शिवकुमार दीवान के अनुसार, उनका बेटा अनिल दीवान बीमारी के कारण कुछ दिनों तक विद्यालय नहीं जा सका था। तबीयत ठीक होने के बाद उसने स्कूल जाना शुरू किया, लेकिन पालक का आरोप है कि विद्यालय में उसकी उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। इसके बाद लगातार अनुपस्थित रहने का हवाला देते हुए उसे नाम काटने का नोटिस जारी कर दिया गया।

पालक का यह भी कहना है कि इसी तरह के नोटिस तीन-चार अन्य विद्यार्थियों को भी जारी किए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में अन्य विद्यार्थियों और उनके पालकों का पक्ष सामने आना बाकी है।

बच्चों को प्रोत्साहन की जरूरत, नोटिस से बढ़ी नाराजगी

इस मामले ने विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने और अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के प्रति अपनाए जाने वाले रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। पालक का कहना है कि शिक्षकों का दायित्व बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना, उनकी समस्याओं को समझना और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखना है। यदि कोई विद्यार्थी बीमारी के कारण स्कूल नहीं आ पाता है, तो उसकी स्थिति को समझते हुए उचित मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए।

पालक का आरोप है कि बीमारी से उबरने के बाद स्कूल पहुंचने वाले बच्चे को प्रोत्साहित करने के बजाय नोटिस जारी कर नाम काटने की चेतावनी देना उचित नहीं है। इससे विद्यार्थियों के मनोबल पर भी असर पड़ सकता है।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

विद्यालय में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन बीमारी के कारण अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के मामलों में संवेदनशीलता और नियमों के अनुरूप कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित छात्र के स्कूल लौटने के बाद उसकी उपस्थिति दर्ज क्यों नहीं हुई, यदि पालक का आरोप सही है, और किन परिस्थितियों में नोटिस जारी किया गया।

अब इस मामले में विद्यालय प्रबंधन का पक्ष सामने आना और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।