28 जुलाई 2024 (रविवार) को रायगढ़ जिले की कौहाकुंडा नामदान केंद्र में संत रामपाल जी महाराज के एक दिवसीय सत्संग का आयोजन एलईडी और प्रोजेक्टर के माध्यम से किया गया।

इस आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे, जिन्होंने संत रामपाल जी के आध्यात्मिक प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना। संत रामपाल जी महाराज ने अपने प्रवचनों में बताया कि हम अपने मनुष्य जीवन को सांसारिक क्रियाओं में ही बर्बाद कर देते हैं और परमात्मा तथा मोक्ष मार्ग की तरफ ध्यान नहीं देते। इससे मनुष्य जीवन, जो कि चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद एक बार मिलता है, नष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन को सफल बनाने और मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण संत से नाम दीक्षा लेकर सतभक्ति करनी चाहिए जिससे हम सभी देवी देवता जैसे: ब्रह्मा विष्णु ,महेश की सच्ची सद्भक्ति बताकर हमारा मनुष्य जीवन सफल कर रहे हैं । संत रामपाल जी महाराज ने कहा कि सतभक्ति करने से भयानक रोगों का भी नाश होता है और समर्थ कबीर परमात्मा अपने सतसाधक की आयु को भी बढ़ा देते हैं। इसका प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2, 5, ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 162 मंत्र 2, ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 163 मंत्र 1-3 और ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 80 मंत्र 2 में है। इस सत्संग समारोह में विशेष बात यह देखने को मिली कि संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने किसी भी प्रकार के नशा से कोसों दूर होकर अनुशासन के साथ सत्संग सुना। सभी के लिए समान व्यवस्था की गई।
संत रामपाल जी महाराज ने यह भी समझाया कि मानव जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य तत्वज्ञान समझ कर मोक्ष की प्राप्ति करना है। सतभक्ति ही एकमात्र ऐसा मार्ग है जो हमें इस जन्म – मरण से निकाल सकते हैं और गीता अध्याय 18 श्लोक 62 अनुसार शाश्वत स्थान तक पहुंचा सकता है।
सतसंग की आधी घड़ी,
तप के वर्ष हजार।
तो भी बराबर है नहीं,
कहे कबीर विचार।।









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