February 6, 2026

दवाओं के अपशिष्ट और नीडल का अवैध निपटान: पर्यावरण प्रदूषण का बढ़ता खतरा

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बसना/लम्बर : गोपाल लहरिया

पूरा मामला बसना विकास खंड के ग्राम पंचायत लंबर से लगभग 1.500(डेढ़ किलोमीटर)किलोमीटर दूर ढूटीकोना मार्ग में यह देखा गया है कि कुछ निजी क्लीनिक या स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा दवाओं के अपशिष्ट और इस्तेमाल की गई नीडल्स,दवाई,को सड़क किनारे या खुले में फेंका जा रहा है।
यह गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि इस प्रकार का अवैध निपटान न केवल पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक खतरा बन सकता है।
शहर या ग्रामीण इलाकों में सड़क किनारे और जंगलों में ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं जहां उपयोग किए गए इंजेक्शन,दवाओं के रैपर और अन्य मेडिकल कचरे के ढेर हो सकते हैं।
इन अपशिष्ट पदार्थों में जहरीले रसायन,संक्रमित सामग्री,और बैक्टीरिया मौजूद होते हैं जो मिट्टी,पानी,आक्सीजन को प्रदूषित करते हैं बल्कि आसपास के लोगों और पशुओ में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते है l
इस्तेमाल की गई नीडल्स और मेडिकल वेस्ट खुले में पड़े रहने से आसपास में निवास रत मानव जीवन और जानवरों पर संक्रमण का खतरा रहता है।
भारत में मेडिकल वेस्ट के निपटान के लिए बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 बनाए गए हैं जिनके तहत हर क्लीनिक,अस्पताल और मेडिकल केंद्र को अपने कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नष्ट करना होता है,लेकिन कई निजी क्लीनिक इन नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध रूप से कचरे का निपटान कर रहे हैं।
दवाओं के अपशिष्ट और नीडल्स का अवैध निपटान न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है,बल्कि यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट भी है l
इस समस्या के समाधान के लिए शासन-प्रशासन एवं स्थानीय जनता को मिलकर काम करना होगा,ताकि एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।