नियम विरुद्ध सहायक शिक्षक पद पर अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त शिक्षक नेता की बहू को बचाया जा रहा
शिक्षक नेता (ससुर)के डर से अधिकारियों का हाथ कार्यवाही करने से काँप रहे
सारंगढ़बिलाईगढ़ – कहते हैं कि संविधान में नियम और कानून सभी के लिए समान होते हैं, चाहे ओ गरीब हो अमीर हो या कम पढ़ा लिखा हो या ज्यादा यहां तक कि किसी वर्ग जाति पद प्रतिष्ठा पर बैठा हो सविधान सबके लिए समान परंतु बात करें सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शिक्षा विभाग की, या जिला-शिक्षा-अधिकारी कार्यालय सारंगढ़-बिलाईगढ़ की, तो यहां नियम कानून कायदे अधिकारीयो का चलता है जहाँ व्यक्ति की पहुँच और पहचान के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा नियम और कानून तय किए जाते हैं, यह कार्यालय कई प्रकार के विचित्र कार्य कलाप के कारण लगातार सुर्खियों में रहते हैं, कभी ए.सी.बी. का छापा तो कभी मुख्य प्रवेश द्वार के चैनल गेट में ताला जड़कर आम जनता को कार्यालय अन्दर प्रवेश से मना करना। इस बार पता चला है कि यहाँ एक महिला को नियम विरुद्ध अनुकम्पा नियुक्ति दे दी गई है।, सूत्र से मिली जानकारी अनुसार महिला का नाम कुमुदिनी साहू है, जिसे बी.एड. अर्हता के आधार पर प्राथमिक शाला सुतीउरकुली विकासखंड बिलाईगढ़ में सहायक शिक्षक के पद पर मार्च 2024 में अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है। यह नियुक्ति पुर्व में रहे जिला शिक्षा अधिकारी एस एन भगत ने दी थी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महिला के ससुर राम कुमार साहू मूल पद व्याख्याता है एवं प्रभारी प्राचार्य के पद पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सुतीउरकुली में पदस्थ है, वह छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के अध्यक्ष हैं, जिसके पहुँच और पहचान के बल पर अधिकारी उसकी बहू कुमुदिनी साहू को पद से हटाने का हिम्मत नहीं कर रहे हैं, जबकि सभी जान रहे हैं कि माननीय सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट बिलासपुर और छत्तीसगढ़ शासन के आदेश के अनुसार दिनाँक 11/08/2023 के पश्चात बी.एड.डिग्री के आधार पर सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त किए गए लगभग 3000 सहायक शिक्षकों की सेवा समाप्त की जा चुकी है। माननीय उच्च न्यायालय और छत्तीसगढ़ शासन के आदेशानुसार सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए डी.एल.एड. होना अनिवार्य है। लेकिन सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले में बीएड धारी को दिया गया जिला शिक्षा अधिकारी लक्ष्मी प्रसाद पटेल के द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत प्रदत्त दस्तावेजों के अनुसार कुमुदिनी साहू की योग्यता बी.एड. है। उसके द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति हेतु प्रस्तुत दस्तावेजों में डी.एल.एड. प्रमाण पत्र संलग्न नहीं है। छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के नियमानुसार सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए जो शैक्षणिक/प्रशैक्षणिक अर्हता निर्धारित है, वही अर्हता अनुकम्पा नियुक्ति के लिए भी है। इस प्रकार कुमुदिनी साहू की अनुकम्पा नियुक्ति आदेश को भी तत्काल निरस्त किया जाना चहिए था। इस संबंध में एक आवेदक की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी जिला-सारंगढ़-बिलाईगढ़ को आवेदन के माध्यम से कुमुदिनी साहू की अनुकम्पा नियुक्ति आदेश को निरस्त करने की मांग भी की गई है, इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आज पर्यन्त डेढ़ माह बाद भी अनुकंपा नियुक्ति आदेश को निरस्त नहीं किया गया है, जिससे जिला शिक्षा अधिकारी लक्ष्मी प्रसाद पटेल का कार्य संदेह के दायरे में है तथा कही मामले को दबाया तो नही जा रहा है? कही लेन देन कर संबंधित शिक्षिका को बचाने का प्रयास तो नही किया जा रहा? जिला शिक्षा अधिकारी ही नियम को ताड़ ताड़ कर रहे

इस संबंध में संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर को भी छत्तीसगढ़ शिक्षक कांग्रस की ओर से ज्ञापन दिया गया है, जिस पर क्या कार्यवाही की गई है, उसकी जानकारी अभी तक नहीं दी गई है। क्या एल पी पटेल नही मानते हाई कोर्ट नियम कानून? क्या कुमुदनी साहू पर लागू नही होती हाई कोर्ट, सरकार के नियम कानून? 3000 सहायक शिक्षक हटाए गए तो कुमुद्नी साहू को अभयदान क्यों? हाई कोर्ट और छत्तीसगढ़ सरकार की आदेशों की अवहेलना कर रहे जिला शिक्षा अधिकारी क्या होगी जिला शिक्षा अधिकारी पर कार्यवाही? अब देखना होगा कि नियम विरुद्ध की गई अनुकम्पा नियुक्ति आदेश को निरस्त किया जाता है या नहीं?


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