February 5, 2026

अशासकीय विद्यालयों की लंबित मांगों को पूर्ण करने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौपा ज्ञापन

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सारँगढ – वैसे तो आज शिक्षा के दो प्लेट फार्म है एक शासकीय और दूसरा निजी आज जितने सरकारी स्कूल में बच्चे पढ़ते है उससे कई गुना ज्यादा बच्चो की संख्या निजी स्कूल में बढ़ती जा रहीं और ऐसे में शासन निजी स्कूलों में भी मुफ्त में शिक्षा मिले उसे प्राथमिकता दे रही जिसे आरटीई कहा जाता है लेकिन कुछ वर्षो से आरटीई की राशि मिलने में काफ़ी विलंभ हो रही और निजी स्कूलों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिसको लेकर छ.ग. राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को 6 मांगो को लेकर ज्ञापन सौपा जिसमे उल्लेखनीय है कि

  1. अब तक की बचत RTE की राशि की प्रतिपूर्ति राशि शीघ्र ही स्कूलों के खाते में हस्तांतरित किए जाए। साथ ही अनुरोध है कि RTE की प्रतिपूर्ति राशि प्रतिवर्ष सत्रांत 30 अप्रैल तक प्रदान कर दिए जाए।
  2. विगत 14 वर्षों से RTE की राशि की प्रतिपूर्ति राशि में कोई वृद्धि नहीं की गई है, अनुरोध है कि-प्राथमिक कक्षाओं हेतु 7000 से 15000 किया जाए।माध्यमिक कक्षाओं हेतु 11500 से 18000 किया जाए।उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं हेतु 15000 से 25000 किया जाए।
  3. RTE के अन्तर्गत नामांकित छात्रों को पाठ्य पुस्तक एवं गणवेश हेतु दी जाने वाली राशि 541 की वृद्धि करते हुए 2000 किया जाए तथा यह राशि छात्रों के खाते में DBT के रुप में किए जाए।
  4. नीजी स्कूलों में पढ़ रहे छात्राओं को भी सरस्वती सायकल योजना का लाभ दिया जाए।
  5. पूर्व में नीजी स्कूलों को शासन द्वारा तदर्थ अनुदान दिया जाता था। उसे पुनः लागू किया जाए।
  6. RTE PORTAL में विभिन्न तकनीकि समस्यों को दूर किया जाए।

पूरे प्रदेश में यह ज्ञापन आज सौंपा गया है