February 5, 2026

ग्रामीण क्षेत्रों में हरेली त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

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बसना/सरायपाली : खबर निरीक्षण

महासमुंद जिले के बसना एवं सरायपाली विकास खंड के अंतर्गत आने वाले कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ के पहली त्यौहार हरेली को एक दिन पहले बड़े हर्षोल्लास के साथ दिनांक 23.07.2025(दिन बुधवार)को मनाया गया l
हरेली त्यौहार छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण पारंपरिक त्यौहार है जो श्रावण मास की अमावस्या को मनाया जाता है।
यह त्यौहार कृषि और हरियाली से जुड़ा हुआ है और किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है।
हरेली त्यौहार का नाम हरियाली से लिया गया है जो इस पर्व के मूल भाव को दर्शाता है।
सावन के महीने में जब खेतों में धान की रोपाई चरम पर होती है और चारों ओर हरियाली छाई रहती हैl
हरेली त्यौहार किसानों के उत्साह और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बनता है और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन में इस पर्व का विशेष महत्व रहता है क्योंकि यह खेती,पशुधन और पर्यावरण के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाता है l
हरेली त्यौहार हरियाली और समृद्धि का प्रतीक यह त्यौहार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है।
हरेली त्यौहार न केवल कृषि और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करता है बल्कि सामाजिक एकता और परंपराओं के सम्मान को भी दर्शाता है l
हरेली त्यौहार छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है और यह पर्व प्रकृति,खेती और सामुदायिक एकता के गहरे रिश्ते को दर्शाता है।
पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति सम्मान और सामाजिक जुड़ाव भी झलकता है। हरेली त्यौहार न केवल एक त्यौहार है बल्कि छत्तीसगढ़ के जीवन दर्शन और प्रकृति के साथ तालमेल का प्रतीक भी है।
हरेली त्यौहार के दिन किसान अपने कृषि यंत्रों जैसे हल,राफा,कुदारी,तंगिया की साफ-सफाई कर औजारों की पूजा करते हैं एवं साथ ही साथ गाय,बैल और भैंस जैसे पालतू पशुओं को नहलाया जाता है और विशेष ध्यान दिया जाता है l
हरेली त्यौहार के दिन प्रायः घरों में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान जैसे गुड़ का चीला,भजिया,पापड़,बड़ा,नड्डा बनाया जाता है।
हरेली त्यौहार पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के महत्व को भी दर्शाता है।
हरेली त्यौहार छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है और यह किसानों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाता है।
हरेली त्यौहार हमें सिखाता है कि प्रकृति से जुड़ना उसके साथ तालमेल रखना और अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाना कितना जरूरी है l