बरमकेला: एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं से प्रभावित होकर ओडिसा के ग्रामीण छत्तीसगढ़ राज्य मे शामिल होने की मंशा रखते हैं लेकिन प्रशासनिक नजरअंदाजी का दंश झेल रहे एक गांव के ग्रामीण मुलभुत सुविधाओं के अभाव मे ओडिसा मे शामिल होना चाहते हैं!
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले मे विकास देखनी हो तो आप फाइलों मे देखिए जमीनी स्तर पर एक गांव ऐसा हैं जहाँ आजादी के दशकों बाद भी सड़क मार्ग जैसी मुलभूत सुविधाओं से ग्रामीण वंचित हैं. हम बात कर रहे हैं बरमकेला विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत परधियापाली के आश्रित ग्राम भालूपानी की जहाँ सैकड़ों लोग आज भी वाहन योग्य सड़क सुविधा के लिए तरस रहे हैं।

कंधे पर उठाकर मरीजों को पहुंचाना पड़ता है अस्पताल-
मेढ़ नुमा सड़क मे आये दिन हादसे का शिकार होते हैं, यह कोई फ़िल्मी कहानी नहीं बल्कि भालूपानी गांव के ग्रामीणों की हकीकत दांस्ता है। भालूपानी के बाशिंदे आजतक आजादी के सात दशक बाद भी विकास से कोसों दूर हैं। आपात स्थिति में मरीज को आज भी कंधे पर डंडों के सहारे उठाकर अस्पताल तक पहुंचाना पड़ता है।
पीठ पर बोझा ढोने के मजबूर लोग
सड़क मार्ग के अभाव में यहां के लोगों को कई बार ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जहाँ सामान को पीठ पर उठाकर ले जाना पड़ता है। गांव के सैकड़ों लोग अभी तक सरकार और प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कब उनकी दहलीज तक भी सड़क पहुंचेगी. यहां के लोग अभी तक अपनी पीठ पर बोझ ढोने को मजबूर हैं। इन गांवों में जब कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो स्थिति दयनीय हो जाती है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर उठ रहे सवाल-
मीडिया को ग्रामीणों ने बताया की दशकों से सभी पार्टी के उम्मीदवार चुनावी मुद्दा मे सड़क बनवाने का वादा जरते हैं लेकिन इनकी आँखे इसी आस मे टिकी रहती है की कब सड़क बने लेकिन जीत के बाद ना तो नेता आते हैं ना ही सड़क। लेकिन जो स्थानीय प्रतिनिधि हैं उनके नियत पर भी सवाल उठना लाज़मी है जिससे ग्रामीणों का प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मोह भंग होता दिख रहा है।
क्या कहते हैं जनपद सीईओ –
सड़क सबंधित समस्या को लेकर ज़ब जनपद सीईओ श्री पटेल से दूरभाष के माध्यम से अवगत कराया गया तो उनका कहना है आपके द्वारा अभी मुझे जानकरी प्राप्त हुई है मै स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं पंचायत कर्मियीं से मामले का संज्ञान लेकर प्राथमिकता क्रम मे रखने हेतु निर्देशित करता हूं।

कुछ सालों से मीडिया लगातार खबर दिखा रहा लेकिन सिस्टम बहरी जिसे कभी नहीं चुभा और न ही नीयत जागी फिलहाल आज भी जनता की आवाज बहरी सरकार और प्रशासन तक पहुंचा रहे और तब तक लिखेंगे जब तक सिस्टम जाग नहीं जाता









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