”पूर्व बजरंग दल जिला संयोजक उमेश कुमार सेन विश्व हिंदू परिषद जिला सह मंत्री का आह्वान 25 दिसंबर को मनाएं “तुलसी पूजा दिवस”, भारतीय संस्कृति के गौरव को पुनः जगाएं
बालोद।
पूर्व बजरंग दल जिला संयोजक विश्व हिंदू परिषद जिला सह मंत्री उमेश कुमार सेन ने कहा कि 25 दिसंबर को जहाँ पश्चिमी संस्कृति में “क्रिसमस” मनाया जाता है, वहीं भारत की सनातन परंपरा में “तुलसी पूजा दिवस” का विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति में तुलसी को माँ के समान पूजनीय स्थान प्राप्त है। तुलसी न केवल धार्मिक प्रतीक है बल्कि आयुर्वेद, पर्यावरण और जीवन के संतुलन की धरोहर भी है।
🌿 तुलसी पूजा का महत्व
तुलसी को हिंदू धर्म में देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। शास्त्रों के अनुसार घर में तुलसी का पौधा धन, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक होता है।
स्कंद पुराण और पद्म पुराण में वर्णन है कि तुलसी भगवान विष्णु को अति प्रिय है। तुलसी के बिना कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती।
तुलसी पूजा दिवस का उद्देश्य है —
लोगों को भारतीय परंपराओं से जोड़ना
प्रकृति और धर्म के प्रति सम्मान को बढ़ाना
विदेशी संस्कृति के अंधानुकरण से बचना
📜 इतिहास और पौराणिक संदर्भ
तुलसी का उल्लेख वेदों, पुराणों और महाभारत में मिलता है। कथा के अनुसार देवी तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप से हुआ था, जिसे तुलसी विवाह कहा जाता है।
पौराणिक काल से ही तुलसी को जीवनदायिनी, रोगनाशक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने वाली देवी माना गया है।
प्राचीन भारत में हर घर के आंगन में तुलसी चौरा बनाकर सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा रही है, जो आज भी कई परिवारों में जीवित है।
👨👩👧👦 बच्चों को सिखाएं अपनी संस्कृति
उमेश कुमार सेन ने कहा कि आज समय की आवश्यकता है कि सनातन धर्म के माता-पिता अपने बच्चों को क्रिसमस या विदेशी पर्वों की बजाय तुलसी पूजा का महत्व समझाएं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और देवी-देवताओं के बारे में जानकारी देना हमारी जिम्मेदारी है।
“यदि हम अपने बच्चों को तुलसी माता, गीता, रामायण और हमारे सनातन मूल्य सिखाएंगे तो आने वाली पीढ़ियाँ अपने धर्म और संस्कृति पर गर्व महसूस करेंगी।”
हमारी संस्कृति, हमारे रंग
भारत की संस्कृति विविध रंगों से भरी है — यहाँ हर पेड़, पौधा और परंपरा में जीवन का दर्शन मिलता है। तुलसी पूजा दिवस का संदेश है कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें, भारतीयता को अपनाएं और अपनी सांस्कृतिक पहचान को गौरव के साथ आगे बढ़ाएं।
उमेश कुमार सेन ने कहा कि “हमारा उद्देश्य किसी धर्म या पर्व का विरोध नहीं, बल्कि अपने धर्म-संस्कारों का सम्मान और प्रसार करना है। तुलसी पूजा दिवस हमें अपने घर-आंगन में भारतीय संस्कृति की सुगंध फैलाने का अवसर देता है।”
उन्होंने जिलेवासियों से अपील की है कि 25 दिसंबर को अपने घरों में तुलसी माता की पूजा करें, दीप जलाएं और भारतीय संस्कृति के इस पर्व को परिवार सहित मनाएं।

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