सारँगढ़ बिलाईगढ़-संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त देशभर में मंडल स्तर पर एक महीने की अंतराल पे एक लाख हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन हो रहा है.
इसी उपलक्ष्य में आज सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला अंतर्गत साल्हेओना मण्डल में एक विशाल हिन्दू सम्मेलन स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय प्रांगण में आयोजित हुई.
इस अवसर पर सनातन धर्म की एकता और अखंडता की चर्चा की गई तथा राष्ट्रभक्ति और एकजुटता पर जोर दिया गया.
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया.

तत्पश्चात समस्त अतिथियों का स्वागत चंदन तिलक,माल्यार्पण,श्रीफल व शाल से ईश्वर प्रसाद साहू,जयप्रकाश पटेल,चूड़ामणि पटेल,जयरतन पटेल,गजिन्दर पटेल के द्वारा किया गया.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी शिवानंद गौसेवा आश्रम भीखमपुरा से पधारे महामण्डलेश्वर श्री रामप्रिय दास जी महाराज ने शास्त्रीय प्रमाण देकर जातिप्रथा का खंडन किया। उन्होंने कहा कि भारत अनादिकाल से हिन्दू राष्ट्र है तथा इसकी रक्षा के लिए अपने आपको बलिदान कर दे वहीं तो हिन्दू है.
महाराज जी ने आगाह किया कि आने वाले समय में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और कहा कि सनातन संस्कृति को सुरक्षा की दृष्टि से हम सबको जाग्रत होना पड़ेगा. चूंकि कुछ विधर्मी लोग किसी एक मजहब को खुश करने हेतु कुछ भी बोल रहे हैं और हिन्दू समाज को तोड़ने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं.
मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रायगढ़ के विभाग प्रचारक राजकुमार भारद्वाज जी ने देश के गौरवशाली इतिहासकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज के सभी महापुरुषों का सम्मान करते हुए हमें उनसे सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने श्रीराम चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान राम और उनके परिवार से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि श्री राम अपने घर से बाहर निकलकर त्याग, तपस्या की है तब जाके वे राजा राम से भगवान राम बने.
श्री भारद्वाज ने इतिहास से सबक लेकर भविष्य की चिंता करने की बात कहकर बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छोटे-छोटे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को एकजुट करने का निरंतर प्रयास कर रहा है और ‘पांच परिवर्तन’ की जानकारी भी समाज में व्यापक रूप से दी है.
विशिष्ट अतिथि हरिनाम भिक्षुक गुरु श्री नरसिंह दाश जी महाराज ने भी सम्बोधित किया और कहा कि अपनी रहन सहन,वेशभूषा व व्यवहार में दिखावा नहीं बल्कि सुधार करने की जरूरत है.
श्री महाराज ने कहा नर नारायण स्वरूप को पहचान कर क्या करना है और क्या नहीं करना है इसे अपने आचरण में उतारें.
कार्यक्रम की अध्यक्षता भोजकुमार नायक ने की तो संचालन राधामोहन पाणिग्राही ने किया।

▶️इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस मौके पर युवराज चौधरी,पूजा संतोष चौहान,मदनकुमारी शौकीलाल सहिस,भुवन पटेल,तेजप्यारी अरूण सिदार,हितेश मालाकार,रत्नाबाई लखन सारथी,वन्दे युवा समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य गण,सरस्वती शिशु मंदिर के आचार्य एवं दीदी तथा हिन्दू सम्मेलन आयोजन समिति के समस्त पदाधिकारी व सदस्य गण सहित सैकड़ों की संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।







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