बालोद। होलिका दहन के अवसर पर जहां एक ओर लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जंगलों को आग से बचाने की एक अनोखी पहल सामने आई है। ग्रीन कमांडो के नाम से पहचाने जाने वाले वीरेंद्र सिंह इन दिनों डिटोका पारा क्षेत्र के जंगलों में इमरज (ढोल) बजाकर ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं।
इमरज की आवाज से फैला रहे जागरूकता
वीरेंद्र सिंह महुआ बीनने जाने वाले ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित करने के लिए इमरज बजाते हैं। जैसे ही लोग एकत्रित होते हैं, वे उनसे अपील करते हैं कि जंगलों में आग न फैलाएं और सूखे पत्तों में चिंगारी न छोड़ें। उनका स्पष्ट संदेश है— “जंगल हैं तो जीवन है।”
जंगल और जीवन का गहरा संबंध
वे ग्रामीणों को समझाते हैं कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। जंगलों में आग लगने से हरियाली नष्ट होती है, वन्यजीवों का आवास खतरे में पड़ता है और पर्यावरण संतुलन बिगड़ता है। इसका असर वर्षा चक्र पर भी पड़ता है।
महुआ सीजन में बढ़ता है खतरा
इन दिनों महुआ बीनने का मौसम है। बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगलों की ओर रुख करते हैं। सूखे पत्तों की परत और गर्म मौसम आग लगने की आशंका को बढ़ा देते हैं। थोड़ी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का रूप ले सकती है।
होलिका दहन पर विशेष अपील
होलिका दहन के अवसर पर वीरेंद्र सिंह ने सभी नागरिकों से खुले स्थान पर सुरक्षित तरीके से होलिका दहन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि आग आसपास के जंगल या सूखी घास तक न पहुंचे।
ग्रामीणों का मिल रहा समर्थन
दल्ली राजहरा के डिटोका पारा क्षेत्र के ग्रामीण भी इस पहल का समर्थन कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि इमरज की आवाज सुनकर वे रुकते हैं और संदेश सुनते हैं। ग्रामीणों ने संकल्प लिया है कि वे स्वयं सावधानी बरतेंगे और अन्य लोगों को भी आग से बचाव के प्रति जागरूक करेंगे।
वीरेंद्र सिंह की यह पहल न केवल जंगलों की रक्षा का प्रयास है, बल्कि समाज को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक प्रेरक कदम भी है।

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