March 18, 2026

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को बड़ी राहत, 582 पदोन्नतियां निरस्त — संघ ने मनाया जश्न

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के कर्मचारी भवन, बिलासपुर में छत्तीसगढ़ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण एवं विस्तृत बैठक प्रांतीय अध्यक्ष श्री विजय कुमार लहरे की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश भर से बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे, जहां संघ के विभिन्न लंबित मुद्दों, विशेषकर पदोन्नति संबंधी प्रकरण पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) क्रमांक 693 एवं 695/696-2023 की 12 मार्च 2026 को हुई अंतिम सुनवाई रही। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि इन याचिकाओं पर लंबे समय से प्रदेश के हजारों ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी नजरें टिकाए हुए थे। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दोनों एसएलपी को खारिज किए जाने पर संघ में हर्ष की लहर दौड़ गई। इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए संघ ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे न्याय एवं संवैधानिक व्यवस्था की जीत बताया। साथ ही छत्तीसगढ़ शासन को भी धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

संघ के प्रांतीय अध्यक्ष श्री विजय कुमार लहरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह निर्णय वर्षों से चल रहे संघर्ष, एकजुटता एवं न्याय के प्रति विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि संघ ने हमेशा नियमों एवं संविधान के अनुरूप कार्य करते हुए अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी है और यह जीत उसी का प्रतिफल है।

संघ द्वारा जानकारी दी गई कि छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग में कार्यरत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियम वर्ष 2010 में निर्धारित किए गए थे। किन्तु 4 दिसंबर 2018 को राज्य शासन द्वारा एक अध्यादेश जारी कर इन नियमों में परिवर्तन किया गया, जिससे न केवल अधिकारियों की वरिष्ठता प्रभावित हुई, बल्कि यह संशोधन छत्तीसगढ़ पदोन्नति नियम 2003 के प्रावधानों के विपरीत भी था। इस बदलाव के कारण वरिष्ठता सूची में असंतुलन उत्पन्न हुआ और कई पात्र अधिकारियों के अधिकार प्रभावित हुए।
इस अन्यायपूर्ण संशोधन के विरुद्ध संघ के तत्कालीन प्रांतीय अध्यक्ष श्री एम.पी. आड़े एवं अन्य साथियों ने न्यायालय की शरण ली और माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में याचिका क्रमांक 4742/2019 दायर की। इस याचिका में 4 दिसंबर 2018 के अध्यादेश को चुनौती दी गई थी।

याचिका के लंबित रहने के दौरान संचालक कृषि, छत्तीसगढ़ द्वारा 29 मई 2021 को उसी विवादित अध्यादेश के आधार पर 235 कनिष्ठ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को पदोन्नति प्रदान कर दी गई। हालांकि इन पदोन्नतियों को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखा गया था।

लंबी सुनवाई के बाद माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने 7 अप्रैल 2022 को अपने ऐतिहासिक निर्णय में 4 दिसंबर 2018 के अध्यादेश को निरस्त (Ultra Vires) घोषित कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह संशोधन नियमों एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं था।

उच्च न्यायालय के इस निर्णय के विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन एवं कृषि स्नातक संघ द्वारा पृथक-पृथक विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गईं। इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान संघ की ओर से मजबूत पक्ष रखा गया। अंततः 12 मार्च 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों एसएलपी को खारिज कर दिया, जिससे उच्च न्यायालय का निर्णय पूर्णतः यथावत हो गया।

इस फैसले का सीधा प्रभाव यह हुआ कि याचिका क्रमांक 4742/2019 के लंबित रहने के दौरान की गई कुल 582 पदोन्नतियां स्वतः निरस्त हो गई हैं। इस निर्णय से उन सभी अधिकारियों को राहत मिली है, जिनकी वरिष्ठता प्रभावित हुई थी और जो लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे।
संघ ने स्पष्ट किया कि अब वर्ष 2019 में जारी वरिष्ठता सूची के आधार पर विधिसम्मत एवं पात्र ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को पदोन्नति दिलाने के लिए आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। इस संबंध में शासन स्तर पर आवश्यक पहल करने एवं विभागीय प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कराने हेतु संघ सक्रिय भूमिका निभाएगा।

इस महत्वपूर्ण प्रकरण में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ की ओर से माननीय अधिवक्ता श्री अनुराग दयाल श्रीवास्तव, श्री गौरव चौधरी, श्री साहिल टैंगोटा एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री शोएब आलम द्वारा प्रभावी पैरवी की गई, जिनके प्रति संघ ने विशेष आभार व्यक्त किया।

बैठक में छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री पवन कुमार शर्मा, जिला अध्यक्ष श्री किशोर शर्मा, संघ के संरक्षक श्री एम.पी. आड़े सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से श्री आर.एल. गुप्ता, श्री राजेंद्र वर्मा, श्री मनोज कुमार, श्री डी.पी. सूर्यवंशी, सुश्री गीता जुरेसिया, श्रीमती अनीता सोनी, श्री विजय धीरज, श्री नलिनी चंद्राकर, श्री जे.एस. मरकाम, श्री परसराम भारद्वाज, श्री पी.डी. दोहरे, श्री कुंज बिहारी, श्री जे.एस. नाटियां, श्री ओ.पी. डहरिया, श्री अरुण एक्का, श्री अश्वनी कुर्रे, श्री नरेश कुमार बघेल, श्री नारायण प्रसाद लक्ष्मे, श्री के.पी. महेश, श्री राधेश्याम बघेल, श्रीमती फूल कुमारी, श्रीमती नरेटी रोहिणी मेश्राम, श्रीमती फिलोमिना खाखा सहित सैकड़ों कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
बैठक के समापन के पश्चात सभी उपस्थित कर्मचारियों ने इस ऐतिहासिक जीत की खुशी में होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी तथा न्यायिक विजय को संगठन की एकता और संघर्ष की सफलता के रूप में मनाया।