March 20, 2026

जनता की आवाज से बदला मंजर: हाईवे 930 की मरम्मत शुरू, प्रशासन हरकत में

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बालोद -शहर के बीचों-बीच बने नेशनल हाईवे 930 की जर्जर हालत को लेकर उठी जनआवाज आखिरकार असर दिखाने लगी है। नए बस स्टैंड से दल्लीराजहरा चौक तक करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क, जो कुछ ही महीनों में जगह-जगह धंसने लगी थी, अब मरम्मत के दौर से गुजर रही है। इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब समाजसेवी उमेश कुमार सेन ने खुलकर प्रशासन और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और इसे जनहित का मुद्दा बना दिया।

सड़क बनी परेशानी का कारण

स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क बने अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ था कि कई जगहों पर गड्ढे और धंसाव दिखाई देने लगे। सबसे ज्यादा परेशानी शहर के मुख्य मार्ग पर हो रही थी, जहां से रोजाना सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। लोगों का कहना है कि इतनी जल्दी सड़क खराब होना निर्माण की गुणवत्ता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

मुद्दा उठा तो बढ़ा दबाव

समाजसेवी उमेश कुमार सेन ने इस मामले को केवल शिकायत तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लगातार आवाज उठाकर जिम्मेदार अधिकारियों को घेरा। उन्होंने निर्माण कार्य में लापरवाही, घटिया सामग्री के इस्तेमाल और निगरानी की कमी का आरोप लगाया।
उनका कहना था कि जनता के टैक्स से बनने वाले कामों में इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती और दोषियों पर कार्रवाई होना जरूरी है।

खबरें छपीं तो प्रशासन जागा

मामला तब और गर्माया जब स्थानीय स्तर पर लगातार खबरें प्रकाशित होने लगीं और लोगों ने भी खुलकर नाराजगी जताई। बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार प्रशासन ने सड़क के खराब हिस्सों की मरम्मत शुरू करा दी।
फिलहाल कई स्थानों पर पैचवर्क और रिपेयरिंग का काम चल रहा है, हालांकि लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि इस बार काम कितनी गुणवत्ता से होता है।

जांच की मांग अभी भी कायम

उमेश कुमार सेन ने साफ कहा है कि केवल मरम्मत काफी नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि पहले हुए निर्माण की जांच हो और जो भी जिम्मेदार हो, उस पर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई तो ऐसे मामले आगे भी सामने आते रहेंगे।

आम लोगों में चर्चा का विषय

हाईवे 930 का मामला अब सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इस बात की मिसाल बन गया है कि अगर कोई लगातार आवाज उठाए तो व्यवस्था को सुनना पड़ता है। शहर में लोग इसे जनदबाव की जीत मान रहे हैं, लेकिन साथ ही यह भी कह रहे हैं कि असली जीत तब होगी जब सड़क लंबे समय तक टिके।