May 12, 2026

बिना अनुमति वर्षों से चल रहा डिजिटल सिस्टम? नगर पालिका बालोद पर गंभीर सवाल, अपर कलेक्टर से जांच की मांग

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बालोद। जिले में सुशासन और पारदर्शिता के दावों के बीच नगर पालिका परिषद बालोद से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। जनहित के मुद्दों को लगातार उठाने वाले नागरिक उमेश कुमार सेन ने नगर पालिका में वर्षों से संचालित कम्प्यूटरीकरण एवं डिजिटल लेखा-जोखा प्रणाली को लेकर अपर कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, नगर पालिका परिषद बालोद में लंबे समय से कम्प्यूटर आधारित कार्य और डिजिटल लेखा प्रणाली संचालित की जा रही है, लेकिन इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति, आदेश या वैधानिक प्रस्ताव का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी में स्वयं विभाग ने स्वीकार किया कि संबंधित कोई प्रशासनिक आदेश अथवा स्वीकृति उपलब्ध नहीं है।

इस खुलासे के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। बिना वैधानिक अनुमति किसी डिजिटल या वित्तीय प्रणाली का संचालन शासन के नियमों के विपरीत माना जाता है, जिससे संभावित वित्तीय अनियमितता और जवाबदेही पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

शिकायतों का लंबा सिलसिला, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

मामले को लेकर उमेश कुमार सेन ने पहले नगर पालिका परिषद बालोद में आवेदन देकर जानकारी मांगी थी। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय बालोद में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। मामला जिला स्तर से आगे बढ़ते हुए दुर्ग संभाग कार्यालय तक पहुंचा, वहीं राज्य स्तर पर भी संबंधित विभागों और उच्च अधिकारियों को आवेदन भेजे गए।

इसके अलावा आरटीआई के माध्यम से दस्तावेज मांगे गए, जिसमें विभाग ने स्पष्ट रूप से बताया कि किसी प्रकार की प्रशासनिक स्वीकृति उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, इस मुद्दे को सुशासन त्यौहार के दौरान आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में भी उठाया गया, ताकि प्रशासन सीधे तौर पर मामले से अवगत हो सके।

लगातार प्रयासों के बावजूद समाधान नहीं

नगर पालिका से लेकर जिला, संभाग और राज्य स्तर तक शिकायत पहुंचने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से शिकायतकर्ता ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मामला लंबे समय से लंबित है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस पर प्रभावी कदम उठाने में असफल रहे हैं। इसी कारण उन्हें पुनः अपर कलेक्टर के समक्ष विस्तृत शिकायत प्रस्तुत करनी पड़ी।

अपने आवेदन में उमेश कुमार सेन ने इसे केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जनता में बढ़ रही जागरूकता

सुशासन त्यौहार जैसे मंच पर इस मुद्दे को उठाया जाना यह संकेत देता है कि अब आम नागरिक शासन-प्रशासन से पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा खुलकर कर रहे हैं। अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाए जाते हैं और जनता के भरोसे को कैसे कायम रखा जाता है।