February 6, 2026

बांगलादेश मे हिन्दुओ पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ हिन्दू एकता मंच ने आंदोलन व विरोध प्रदर्शन ,,

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सारँगढ़ – बांग्लादेश में निवासरत अल्पसंख्यक हिंदुओं की हत्या, मंदिरों में तोड़फोड़, हिंदू संतों की गिरफ्तारी, महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार की बढ़ती घटनाओं के विरोध में 3 दिसंबर को सारँगढ़ नगर रानी लक्ष्मीबाई काम्प्लेक्स में सर्व हिन्दू एकता मंच के नेतृत्व में बांग्लादेश सरकार के खिलाफ हल्लाबोल आंदोलन किया

जमकर बरसे कहा  हिंदुओं के ऊपर हमलों व संतों की गिरफ्तारी पर बांग्लादेश सरकार की मौन स्वीकृति व कट्टरपंथी जेहादियों को खुली छूट देने पर नाराजगी व्यक्त किया।
सर्व हिन्दू समाज संगठनों ने जिले के सभी हिन्दू संगठनों, मंदिर समितियों, युवा संगठनों, व्यापारी संगठनों सहित सभी महिला मंडली व समिति की लोग लगभग 500 से 700 की संख्या मे रानी लक्ष्मी बाई काम्प्लेक्स मे एकत्रिकरण होकर सारंगढ़ नगर का भ्रमण करते हुई भारत माता चौक के सामने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौपा जिसमे उल्लेखनीय है


27 नवंबर 2024, मैमनसिंह: एक हिंदू दुकानदार पर हमला कर उसकी दुकान को लूट लिया गया, जिससे उसका जीवन और आजीविका प्रभावित हुई। 26 नवंबर 2024, सिराजगंज: कट्टरपंथियों द्वारा लोकनाथ मंदिर पर पेट्रोल बम फेंका गया, जिससे मंदिर को नुकसान पहुँचाया गया और हिंदू धार्मिक स्थलों पर हमला किया गया।

25 नवंबर 2024, ढाका: इस्कॉन के चिन्मय कृष्ण दास जी को झूठे देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जो कि धार्मिक स्वतंत्रता और मानवीय अधिकारों का उल्लंघन था। 24 नवंबर 2024, बगेरहाट: एक हिंदू लड़की को जबरन धर्मांतरण कर आतंकी संगठन में शामिल किया गया, जो एक गंभीर अपराध है और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों का प्रतीक है। 20 नवंबर 2024, बरिसाल: हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे उनकी संपत्ति और सम्मान को नष्ट कर दिया गया। 19 सितंबर 2024, सिलहट: बौद्ध और हिंदू मंदिरों को तोड़-फोड़ कर आग लगा दी गई, जो धार्मिक असहिष्णुता और सांस्कृतिक धरोहर को नष्ट करने का एक प्रयास था।

इन घटनाओं में हजारों हिंदू, बौद्ध और ईसाई परिवारों को विस्थापित किया गया है और उनके धार्मिक स्थलों को तोड़ा गया है। उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमले किए जा रहे हैं, जो न केवल बांग्लादेश के संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं, बल्कि हमारे समग्र मानवता के लिए भी एक खतरा हैं।

राष्ट्रपति से मांग

  1. भारत सरकार द्वारा बांग्लादेश सरकार पर दबाव डाला जाए ताकि वहां अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और धार्मिक स्वतंत्रता को कायम रखा जा सके।
  2. संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के माध्यम से बांग्लादेश सरकार को इन अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया जाए।
  3. अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए ताकि इस प्रकार के अपराधों की पुनरावृत्ति न हो।