महासमुंद : गोपाल लहरिया
महासमुंद जिले में कुछ गांवों को छोड़कर प्रसिद्ध लोक पर्व छेर-छेरा की धूम है आज खासकर बच्चों व युवाओं में छेर-छेरा पर्व को लेकर भारी उत्साह है l
बच्चे व युवा टोलियों में घर-घर जाकर छेर-छेरा मांग रहे हैं और बच्चे जिस घर में पहुंच रहे हैं वहां के लोग भी दिल खोलकर धान व रुपयों का दान कर रहे हैं।
धन-धान्य का महादान और फसल उत्सव के रूप मनाया जाने वाला छेर-छेरा पर्व छत्तीसगढ़ के सामाजिक समरसता और समृद्ध दानशीलता का प्रतीक है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन दान करने से घरों में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है और इस दिन छत्तीसगढ़ में बच्चे और बड़े सभी एक-दूसरे के घर-घर जाकर अन्न का दान ग्रहण करते हैं l
छत्तीसगढ़ में छेर-छेरा त्यौहार तब मनाया जाता है जब किसान अपने-अपने खेतों से फसल काटकर एवं उसकी मिसाई कर अन्न(नया चावल)को अपने-अपने घरों में भंडारण कर चुके होते है l
छेर-छेरा त्यौहार छत्तीसगढ़ का एक लोकपर्व है जिसे बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है l
यह त्यौहार फसल की कटाई और खेती के मौसम के खत्म होने का प्रतीक है और यह त्यौहार दान देने का पर्व है जिसे किसान साल भर मेहनत करके जो धान उपज करते हैं उसका कुछ दान देकर इस त्यौहार को मनाते हैं l
यह त्यौहार कृषि प्रधान संस्कृति में दानशीलता की परंपरा को याद दिलाता है एवं इस दिन लोग अपने-अपने घरों में आलू चाप,भजिया,बड़ा,समोसा,ऐरसा,पुड़ी,नड्डा,पापड़,और विभिन्न प्रकार के पकवान प्रायः सभी घरों में बनाया जाता है l
छेर-छेरा त्यौहार पौष महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है एवं इस दिन लोग अपने गांवों को छोड़कर बाहर नहीं जाते है और लोग अपने-अपने काम-काज को पूरी तरह से बंद करते है और उत्साह पूर्वक को यह त्यौहार को मनाया जाता है l
इस त्यौहार में ग्राम कापुडीह के बच्चों के उत्साह बढ़ाने के लिए उनके साथ छेर-छेरा मांगते हुए मनीष लहरे,परमानंद खुट्टे,पालेश्वर लहरे,डोलचंद यादव,मायाराम खुट्टे,पदमलोचन खुट्टे इनको सादरम निषाद किराना दुकान वाले द्वारा छेरछेरा प्रदान किया गया l

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