February 5, 2026

बलौदाबाजार में पुलिस पर आदिवासी युवक की पिटाई का आरोप, शराब की शीशी टूटने से घायल — परिजनों ने मांगी न्यायिक कार्रवाई

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बलौदाबाजार। जिले में पुलिस पर एक आदिवासी युवक की पिटाई का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि थाना प्रभारी अजय झा और उनकी टीम ने युवक को बेरहमी से पीटा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। फिलहाल युवक जिला अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है।

पीड़ित युवक हितेश्वर भट्ट ने बताया कि रविवार रात वह रिसदा रोड के पास वह सिगरेट पी रहा था। तभी पुलिस की गश्ती टीम मौके पर पहुंची और बिना पूछताछ के मारपीट शुरू कर दी।
हितेश्वर के अनुसार, “मैं भागने लगा तो टीआई अजय झा ने पीछे से लात मारी। मेरी पिछली जेब में शराब की बोतल रखी थी, जो लात लगने से टूट गई और उसके कांच मेरी कमर में धंस गए। मैं शराब नहीं पी रहा था, बस घर के लिए रखी थी। टीआई ने गाली गलौज भी की।”

घटना के बाद हितेश्वर के साथियों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने उसके जख्मों पर कई टांके लगाए हैं।

मां ने मांगी कार्रवाई:
पीड़ित की मां रानी भट्ट ने कहा, “रात करीब 9 बजे बेटे का फोन आया कि जल्दी अस्पताल आओ। जब पहुंची तो देखा, खून से कपड़े भीग चुके थे। डॉक्टरों ने 7-8 टांके लगाए हैं। बेटा खुद सरकारी कर्मचारी है, अभी-अभी स्कूल ज्वाइन किया था। अब वह बैठ भी नहीं पा रहा। पुलिस वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
इस मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने कहा, “थाना प्रभारी और टीम गश्त पर थे। सूचना मिली थी कि कुछ लोग शराब पी रहे हैं। पुलिस के पहुंचते ही कुछ युवक भागने लगे। हितेश्वर भट्ट भागते समय गिर गया, जिससे उसकी जेब में रखी शराब की शीशी टूट गई और चोट लग गई। पुलिस ने ही उसे अस्पताल में भर्ती कराया है।”।
बताया जा रहा है कि रिसदा रोड पर लगातार शराबियों का जमावड़ा रहता है, जिससे नगरवासी काफी परेशान हैं। नागरिकों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद इस इलाके में शराबियों का अड्डा बना हुआ है।
वहीं नगर में यह चर्चा भी है कि थाना प्रभारी अजय झा लंबे समय से सिटी कोतवाली में पदस्थ हैं, जिस पर लोग सवाल उठा रहे हैं।
युवा कांग्रेस अध्यक्ष शैलेंद्र बंजारे ने इस घटना को मानवाधिकारों का हनन बताते हुए थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जांच की मांग किए है
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, “एक आदिवासी युवक के साथ पुलिस की बर्बरता सुशासन पर सवाल खड़े करती है। जब उससे किसी को खतरा नहीं था, तो इस तरह का अत्याचार क्यों? यह कानून व्यवस्था की विफलता है, सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।”
सिविल सर्जन डॉ. अशोक वर्मा ने बताया कि “पीड़ित हितेश्वर भट्ट के पीठ के निचले हिस्से में कांच के टुकड़े घुसने से चोट आई थी। उसका इलाज जारी है और फिलहाल उसकी स्थिति खतरे से बाहर है।”