बिलाईगढ़ – विगत कुछ दिनो पीछे ग्रामीणों ने चावल नहीं मिलने को लेकर स्थानीय मीडिया से गुहार लगाया था जिसमें खबर चलने के बाद अब पूरे इस मामले की जांच चल रही है आपको बता दे बिलाईगढ़ जनपद पंचायत अन्तर्गत आने वाला गांव चिकनीडीह के स्थानीय ग्रामीणों की शिकायत थी कि सैकडो हितग्राहियों को दो महीने का चावल , शक्कर, नमक नहीं मिला है जिसको लेकर लगातार हितग्राही सेल्समैन से मांग कर रहे थे लेकिन नहीं देने पर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और विभागीय अधिकारियों के साथ मीडिया से शिकायत दर्ज कराई जिसमें अब जांच शुरू हो चुका हैं फिलहाल इस पूरे मामले की सहायक जांच खाद्य अधिकारी बिलाईगढ़ द्वारा किया जा रहा है

जांच में होगा खुलासा आखिर ग्रामीणों को क्यों नहीं मिला राशन,, और कौन था जिम्मेदार
आपको बता दे ग्रामीणों का आरोप था कि उन्हें चावल, शक्कर नमक नहीं था जहां ग्रामीणों के आरोप के साथ विक्रेता ने भी अपना पक्ष रखा था जिसमें उन्होंने भी नान विभाग पर गंभीर आरोप लगाए थे कि उन्हें समय पर चावल नहीं दिया था उसके बाद से कई तरह की सवाल खड़े हो रहे थे कि आखिर हितग्राहियों को चावल क्यों नहीं मिला? नहीं मिला तो किस कारण नहीं मिला? क्या पीडीएस दुकान चिकनीडीह को आबंटन जारी हुआ की नहीं? हुआ तो आखिर कितना हुआ? और कब कब कितनी मात्रा में जारी हुआ? या फिर जारी हुआ था तो फिर हितग्राहियों को क्यों वितरण नहीं किया गया? इन सारे सवालों के जवाब अब जांच के बाद होगा खुलासा

अधिकारी ने जांच कर sdm को सौंपा प्रतिवेदन और sdm ने नान विभाग को किया अवलोकन के साथ किया सूचनार्थ
आपको बता दे इस पूरे मामले में जांच हुआ जिसमें सहायक खाद्य अधिकारी गांव जाकर कई हितग्राहियों से बयान लिया गया वही जांच में अब तक मौखिक जानकारी मिल रही है कि चिकनीडीह गांव के लगभग 100 से अधिक हितग्राहियों को चावल शक्कर नमक नहीं मिला है वहीं पीडीएम गोदाम की जांच करने और आवंटन की जांच करने पर पाया गया है माह अक्टूबर की मासिक आबंटन कम मात्रा में जारी किया गया , वही खाद्य विभाग ने मूल आबंटन 14 अक्टूबर को जारी कर दिया गया था लेकिन पीडीएस संचालक को 31 अक्टूबर को खाद्यान्न का भंडारण किया गया था जिसकी वजह से ग्रामीणों ने शिकायत की,, वही आगे जांच में यह भी बाते निकल कर सामने आ रही की विक्रेता द्वारा हितग्राहियों का राशन और जमा करा कर अंगूठा लगवाया गया था जिसे भी नियम विरुद्ध है दर्ज किया गया साथ ही जांच में यह बात कही जा रही की यह स्थिति आबंटन नान विभाग द्वारा सही समय पर नहीं देने की वजह से ये स्थिति निर्मित हुआ जिसको लेकर खाद्य अधिकारी ने नान विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों की भी गंभीर लापरवाही जांच में अंकित किया गया और dmo को कार्यवाही के लिए अवलोकन भेजा गया अब देखना होगा कि आगे जांच में क्या खुलासा होता है क्या सच में नान विभाग की लापरवाही का नतीजा है या फिर मामला कुछ और?


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