बसपा का संसद में चुनाव सुधारों पर तीन प्रमुख सुझाव: SIR समय-सीमा बढ़ाने, आपराधी प्रत्याशियों की जिम्मेदारी तय करने और VVPAT 100% सत्यापन की मांग
सारंगढ़, : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने संसद में चल रही चुनाव सुधारों की चर्चा के बीच तीन अहम सुझाव पेश किए हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर केंद्रित हैं। पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रदेश नेतृत्व ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को लिखे एक पत्र में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) की समय-सीमा बढ़ाने, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों पर सख्त जिम्मेदारी तय करने तथा ईवीएम-VVPAT की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए 100 प्रतिशत सत्यापन या बैलेट पेपर प्रणाली बहाल करने की मांग की है।
पत्र में बसपा के जिला जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह मल्होत्रा ने कहा है कि आज से संसद में चुनाव सुधारों पर व्यापक चर्चा शुरू हो रही है, और पार्टी इन सुझावों को तत्काल लागू करने की आवश्यकता बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष, मुख्य चुनाव आयुक्त तथा राज्य चुनाव आयुक्त को भी प्रतिलिपि भेजी है। मल्होत्रा ने जोर दिया कि ये सुधार बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा प्रदत्त मताधिकार के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए अनिवार्य हैं।

SIR प्रक्रिया में जल्दबाजी से लाखों मतदाता प्रभावित
पहले सुझाव में बसपा ने SIR की वर्तमान समय-सीमा को ‘अत्यंत कम’ बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि इससे बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिसके कारण उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां 15.40 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, तथा छत्तीसगढ़ में प्रवासी मजदूरों की बड़ी संख्या को देखते हुए कई BLO काम के बोझ से अपनी जान तक गंवा चुके हैं। जल्दबाजी में लाखों वैध मतदाता, विशेषकर गरीब और बाहर प्रवास पर गए लोग, मतदाता सूची से वंचित हो जाते हैं। पार्टी ने सुझाव दिया कि जहां निकट भविष्य में चुनाव न हों, वहां SIR की समय-सीमा पर्याप्त बढ़ाई जाए।
आपराधी प्रत्याशियों का बोझ केवल उम्मीदवार पर

दूसरे बिंदु पर बसपा ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्याशियों को अपना आपराधिक इतिहास हलफनामे में घोषित करना और स्थानीय अखबारों में प्रकाशित करना अनिवार्य है। हालांकि, अक्सर प्रत्याशी पार्टी से इतिहास छुपा लेते हैं, और नामांकन स्क्रूटनी के समय ही जानकारी उजागर होती है। वर्तमान में प्रकाशन का दायित्व राजनीतिक दलों पर डाला गया है, जिससे दल नुकसान झेलते हैं। पार्टी का सुझाव है कि आपराधिक इतिहास छुपाने और प्रकाशन न करने की कानूनी जिम्मेदारी एवं दंड केवल संबंधित प्रत्याशी पर ही हो, न कि दल पर।
EVM विवाद समाप्त करने के लिए 100% VVPAT या बैलेट पेपर
तीसरे सुझाव में ईवीएम में बार-बार उठ रही गड़बड़ी की शिकायतों का जिक्र करते हुए बसपा ने जनता के विश्वास को बहाल करने के लिए दो विकल्प सुझाए हैं: या तो पुनः बैलेट पेपर प्रणाली लागू की जाए, या सभी पोलिंग बूथों पर VVPAT की 100 प्रतिशत पर्चियों की गिनती कर ईवीएम आंकड़ों से मिलान किया जाए। पार्टी ने चुनाव आयोग के ‘समय लगने’ के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि मतदान प्रक्रिया महीनों चलती है, तो कुछ अतिरिक्त घंटों से कोई फर्क नहीं पड़ता। इससे संदेह समाप्त होंगे और राष्ट्रीय हित सधेगा।
बसपा नेतृत्व बहन कुमारी मायावती जी ने ट्विटर पर यह प्रमुख तीन सुझाव दिए हैं जो इस पत्र में स्पष्ट किया कि ये सुझाव देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए हैं, और संसद की चर्चा में इन्हें शामिल कर तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा की गई है। पार्टी ने सूचना प्रदान करने का भी अनुरोध किया है।

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