सेनवीरता, धर्म रक्षा और बलिदान की अमर गाथा हैं दसवें सिख गुरु
बालोद – पूर्व बजरंग दल जिला संयोजक एवं विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री उमेश कुमार सेन ने दसवें सिख गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी को नमन करते हुए कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत के लिए साहस, बलिदान और धर्म रक्षा के प्रतीक हैं। उनका जीवन हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी ने अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष कर समाज को नई दिशा दी। उन्होंने धर्म की रक्षा को सर्वोपरि मानते हुए 13 अप्रैल 1699, बैसाखी के पावन पर्व पर आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की, जिसने सिख समाज में आत्मबल, समानता और संगठन शक्ति का संचार किया।
धर्म रक्षा के लिए खालसा पंथ की स्थापना
गुरु गोविंद सिंह जी ने पंच प्यारों — भाई दया सिंह, भाई धर्म सिंह, भाई हिम्मत सिंह, भाई मोहकम सिंह और भाई साहिब सिंह — को अमृत छकाकर दीक्षित किया और स्पष्ट संदेश दिया—
“खालसा मेरा रूप है खास, खालसे में ही करूं निवास।”
इस ऐतिहासिक क्षण ने समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति दी।
अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष और युद्ध
उन्होंने भांगणी (1688), नादौन (1691) और आनंदपुर साहिब (1704) जैसे युद्धों में मुग़ल सत्ता और पहाड़ी राजाओं के अत्याचारों का डटकर सामना किया। उनका स्पष्ट संदेश था—
“धर्म की रक्षा के लिए उठाई गई तलवार अधर्म नहीं, कर्तव्य है।”
परिवार का सर्वोच्च बलिदान
गुरु गोविंद सिंह जी का पूरा परिवार धर्म रक्षा के लिए शहीद हुआ।
पिता गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों की रक्षा हेतु शीश बलिदान दिया।
साहिबजादे अजीत सिंह और जुजार सिंह चामकौर के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए।
साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को सरहिंद में दीवार में जीवित चुनवा दिया गया।
इन बलिदानों ने यह सिद्ध किया कि धर्म का मार्ग कठिन अवश्य है, लेकिन गौरवशाली है।
महान कवि और दार्शनिक
गुरु गोविंद सिंह जी एक महान साहित्यकार भी थे। उन्होंने दशम ग्रंथ, जफरनामा सहित अनेक वीर रसपूर्ण रचनाएँ लिखीं।
उनका संदेश—
“मानस की जात सबे एकै पहचानो”
मानव समानता और एकता का अमर उद्घोष है।
गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु की गद्दी
1708 में नांदेड़ (महाराष्ट्र) में घायल होने के बाद उन्होंने देह त्याग से पूर्व घोषणा की—
अब गुरु ग्रंथ साहिब जी ही सिखों के शाश्वत गुरु होंगे।
उमेश कुमार सेन ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन आज भी यह सिखाता है कि—
अन्याय के विरुद्ध संघर्ष ही सच्चा धर्म है
धर्म केवल पूजा नहीं, कर्म है
सत्य, त्याग और वीरता से ही समाज और राष्ट्र सुरक्षित रहता है
गुरु गोविंद सिंह जी का नाम युगों-युगों तक अमर रहेगा।
जो बोले सो निहाल… सत श्री अकाल।







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