बालोद। जिले के आदिवासी बहुल डौंडी ब्लॉक में प्रस्तावित व्यवहार न्यायालय को चिखलाकसा के बजाय तहसील मुख्यालय डौंडी में स्थापित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इस संबंध में व्यापारी संघ डौंडी, जिला बालोद द्वारा कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद महोदय को पत्र लिखकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
बालोद जिला प्रदेश का एकमात्र ऐसा आदिवासी ब्लॉक मुख्यालय है, जहां आज तक व्यवहार न्यायालय की स्थापना नहीं हो पाई है। जबकि प्रदेश के अन्य सभी ब्लॉक मुख्यालयों में यह सुविधा उपलब्ध है। डौंडी को 20–25 वर्ष पूर्व पूर्ण तहसील का दर्जा मिल चुका है, इसके बावजूद यहां अब तक न तो रजिस्ट्रार कार्यालय स्थापित हुआ है और न ही व्यवहार न्यायालय।
व्यापारी संघ ने बताया कि डौंडी तहसील मुख्यालय होने के साथ-साथ राजस्व नगर भी है और यहां कुल 62 ग्राम पंचायतें आश्रित हैं। सभी ग्राम पंचायतों से चिखलाकसा की औसत दूरी लगभग 32 किलोमीटर तथा जिला मुख्यालय बालोद की दूरी करीब 62 किलोमीटर है। ऐसे में आम नागरिकों को न्यायिक कार्यों के लिए दूर-दराज की यात्रा करनी पड़ती है, जिससे धन और समय दोनों की बर्बादी होती है, साथ ही मानसिक व शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
पत्र के माध्यम से चेतावनी भी दी गई है कि यदि व्यवहार न्यायालय को तहसील मुख्यालय डौंडी में स्थानांतरित कर स्थापित नहीं किया गया, तो 62 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों, सर्व समाज, आदिवासी समाज एवं व्यापारी संघ द्वारा उग्र आंदोलन एवं चक्का जाम किया जा सकता है। इस विषय में पूर्व में माननीय राज्यपाल को भी मांग पत्र सौंपा जा चुका है।
अंत में सांसद महोदय से आग्रह किया गया है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए चिखलाकसा में प्रस्तावित व्यवहार न्यायालय का स्थान परिवर्तन कर उसे तहसील मुख्यालय डौंडी में स्थापित कराने हेतु आवश्यक अनुशंसा करने की कृपा करें।

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