February 10, 2026

नक्सल विरोधी अभियान में अदम्य साहस की मिसाल बने शहीद आरक्षक वसीत कुमार रावटे

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बालोद में स्मारक स्थापना व प्रतिमा अनावरण कर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

बालोद।
छत्तीसगढ़ पुलिस के वीर सपूत शहीद आरक्षक वसीत कुमार रावटे (STF) की स्मृति में उनके गृह ग्राम फागुन्दाह (सिंगनवाही) में सोमवार 9 फरवरी 2026 को स्मारक स्थापना एवं प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम श्रद्धा और सम्मान के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शहीद को नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

उल्लेखनीय है कि 6 फरवरी 2025 को जिला बीजापुर थाना फरसेगढ़ क्षेत्र अंतर्गत चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान के दौरान 9 फरवरी 2025 को नेशनल पार्क क्षेत्र में पुलिस बल और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान आरक्षक वसीत कुमार रावटे ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए नक्सलियों से डटकर मुकाबला किया। अपने साथियों की रक्षा करते हुए उन्होंने 6 नक्सलियों को मार गिराया। इस अभियान में कुल 31 नक्सली ढेर हुए। मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए शहीद रावटे का बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

स्मारक अनावरण कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने शहीद के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनका साहस और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। बालोद पुलिस द्वारा शहीद के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई तथा हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया गया।

कार्यक्रम में एसटीएफ बटालियन से एडिशनल एसपी आकाश शुक्ला (IPS), डीएसपी यादवदास बघेल, डीएसपी सतीश ध्रुव, बालोद पुलिस से डीएसपी राजेश बागड़े, डीएसपी बोनिफास एक्का सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण श्रद्धा, सम्मान और गौरव से ओतप्रोत रहा।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके अद्वितीय साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान को याद किया तथा उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने का संकल्प लिया।

शहीद आरक्षक वसीत कुमार रावटे का जन्म 26 अक्टूबर 1991 को जिला बालोद के ग्राम फागुन्दाह (सिंगनवाही) में हुआ था। उन्होंने 12 अप्रैल 2016 को छत्तीसगढ़ पुलिस में आरक्षक पद पर भर्ती होकर सेवा प्रारंभ की। कर्तव्यनिष्ठा और बहादुरी के चलते नवंबर 2017 से वे स्पेशल टास्क फोर्स (STF) में सेवाएं दे रहे थे और एक साहसी व समर्पित जवान के रूप में जाने जाते थे।

नक्सल विरोधी अभियान के दौरान उन्होंने अपने कर्तव्य का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान सदैव अमर रहेगा।