बालोद।
जिस तांदुला नदी ने दशकों तक बालोद की धरती को जीवन दिया, आज वही नदी जब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही थी, तब पूरा बालोद एक स्वर में उसके साथ खड़ा दिखाई दिया। जिला प्रशासन बालोद की पहल “नीर चेतना अभियान” के तहत तांदुला नदी को उसके पुराने वैभव, निर्मल धारा और स्वच्छ स्वरूप में लौटाने के लिए जनसहभागिता का ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला।

सुबह से ही नदी तट पर जनप्रतिनिधि, अधिकारी, युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे हाथों में औजार और मन में संकल्प लिए पहुंचे। यह सिर्फ श्रमदान नहीं था, यह कृतज्ञता थी उस नदी के प्रति, जिसने पीढ़ियों को पाला है।
जब प्रशासन और जनता एक साथ उतरे नदी बचाने
वृहद श्रमदान कार्यक्रम में जिले के जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक, अधिकारी–कर्मचारी, एनएसएस, रेडक्रास, महिला कमांडो, आईटीआई सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों की सहभागिता ने यह संदेश दे दिया कि
“नदी बचेगी, तभी भविष्य बचेगा।”

यह दृश्य बताता है कि जब नीति, नीयत और जनता एक दिशा में चलें, तो बदलाव तय होता है।
नीर चेतना अभियान केवल कार्यक्रम नहीं, पीढ़ियों से किया वादा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य लघु वनोपज संघ के उपाध्यक्ष श्री यज्ञदत्त शर्मा, नगर पालिका परिषद बालोद की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा चौधरी, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य श्री यशवंत जैन एवं कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने भावुक शब्दों में जल संरक्षण का महत्व बताया।

उन्होंने कहा कि
“पानी खत्म हुआ तो जीवन खत्म हो जाएगा। आज तांदुला को बचाना, आने वाली पीढ़ियों को बचाने जैसा है।”
शपथ का वह पल, जब तांदुला की आंखों में उम्मीद जगी
शुभारंभ अवसर पर उपस्थित विशाल जनसमूह ने जल संरक्षण एवं संवर्धन की शपथ ली।
वह क्षण सिर्फ औपचारिकता नहीं था, बल्कि हर दिल में उठी एक आवाज थी —
अब तांदुला को यूं नहीं मरने देंगे।
हर वर्ग, हर हाथ, एक उद्देश्य
इस अभियान में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, उपाध्यक्ष श्री तोमन साहू, पद्मश्री श्रीमती शमशाद बेगम, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री चेमन देशमुख, श्री पवन साहू, जिला पंचायत सीईओ श्री सुनील चंद्रवंशी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

साथ ही युवाओं, महिलाओं और स्वयंसेवकों की सहभागिता ने इसे आंदोलन का रूप दे दिया।
तांदुला बचेगी, तो बालोद बचेगा
नीर चेतना अभियान ने यह साबित कर दिया कि तांदुला सिर्फ नदी नहीं, बालोद की आत्मा है।
आज शुरू हुआ यह श्रमदान आने वाले कल के लिए जल–संरक्षण की मशाल बन चुका है।
यह अभियान बताता है — नदी को बचाना केवल सरकार का काम नहीं, हम सबका धर्म है।







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