बालोद।
भारत के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों में शामिल मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। यह पर्व हर वर्ष 14 जनवरी (कभी-कभी 15 जनवरी) को मनाया जाता है, जब सूर्य अपनी दक्षिणायन गति समाप्त कर मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण होता है। इसे अंधकार से प्रकाश, शीत से ऊष्मा और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है।
मकर संक्रांति के अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री (पूर्व) एवं बजरंग दल के जिला संयोजक उमेश कुमार सेन ने बालोद जिलेवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पर्व के धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन सूर्य उपासना, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ अवसर है।
🌞 धार्मिक महत्व
उमेश कुमार सेन ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से मिलने मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे यह पर्व पारिवारिक सौहार्द और सम्मान का प्रतीक बनता है। इस दिन गंगा, यमुना सहित पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को अर्घ्य और दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
🌾 सामाजिक और कृषि दृष्टि से महत्व
मकर संक्रांति किसानों के लिए नई फसल के आगमन का उत्सव है। रबी की फसलें पकने लगती हैं, जिससे समृद्धि और खुशहाली का वातावरण बनता है। देश के विभिन्न हिस्सों में इसे खिचड़ी पर्व, लोहड़ी, उत्तरायण, पोंगल, भोगाली बिहू और गंगा सागर मेले के रूप में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
🔆 वैज्ञानिक महत्व
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक दृष्टि से इस दिन के बाद सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध में अधिक पड़ने लगती हैं, जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। तिल और गुड़ का सेवन शरीर को ऊर्जा और गर्माहट प्रदान करता है, जिससे सर्दी के मौसम में स्वास्थ्य संतुलन बना रहता है।
🌼 संदेश
उमेश कुमार सेन ने कहा कि मकर संक्रांति हमें यह संदेश देती है कि जैसे सूर्य अपनी दिशा बदलकर उत्तर की ओर अग्रसर होता है, वैसे ही हमें भी जीवन में नकारात्मकता छोड़कर परिश्रम, सकारात्मक सोच और उज्ज्वल भविष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने समस्त बालोद जिलेवासियों के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं।








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