February 5, 2026

तय समय से पहले धान खरीदी बंद करना सरकार के लिए बन सकता है गले का फंदा

खबर शेयर करें

गुरुर के खुंदनी धान खरीदी केंद्र में किसानों की आवाज, प्रशासन पर दबाव के बाद शुरू हुई खरीदी

बालोद/गुरुर।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा तय समय से पहले धान खरीदी कार्य को बंद किए जाने का फैसला अब सरकार के लिए भारी पड़ता नजर आ रहा है। बालोद जिले के गुरुर विकासखंड अंतर्गत खुंदनी धान खरीदी केंद्र में किसानों के बढ़ते आक्रोश और राजनीतिक दबाव के बाद आखिरकार धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा के हस्तक्षेप और दबाव के बाद प्रशासन को कदम पीछे खींचना पड़ा। इससे पहले धान नहीं बेच पाने वाले किसान बेहद मायूस नजर आ रहे थे। ग्राम परसूली के किसान बिरसिंह साहू सहित कई अन्य किसान लगातार केंद्र के चक्कर काट रहे थे, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही थी।

419.60 क्विंटल का टोकन काटा गया, फिर भी किसानों को लौटा दिया गया

आज की तारीख में बकायदा 419.60 क्विंटल धान का टोकन काटा गया, बावजूद इसके प्रभावित किसानों को धान खरीदी केंद्र में धान लाने से मना कर दिया गया। इस फैसले से किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिला। केंद्र से यह खबर सुनते ही किसान हताश और निराश नजर आए।

कांग्रेस नेताओं ने उठाई किसानों की आवाज

प्रभावित किसानों की गंभीर समस्या को सुनने के बाद कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष डॉक्टर किशोर साहू, शादिक अली (महामंत्री कांग्रेस), शैलेश (मोनू) ठाकुर – ब्लॉक युवा कांग्रेस अध्यक्ष, हिमांशु लावरे सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता और आसपास के किसान मौके पर मौजूद रहे।

7 करोड़ के धान घोटाले के बाद अब ईमानदार किसान भुगत रहे सजा?

जानकारों का कहना है कि करीब 7 करोड़ रुपये के धान घोटाले के बाद प्रशासन द्वारा कथित रूप से बिचौलियों और माफियाओं पर कार्रवाई तो की गई, लेकिन इसका खामियाजा अब सीधे-साधे ईमानदार किसानों को भुगतना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ के कई किसान खून पसीना बहाकर धान उगाने वाले आज एक – एक दाना धान बेचने के लिए जूझ रहे है, कई किसान रकबा सत्यापन के नाम पे परेशान हो रहे केंद्र में जानकारी लेने पर ये कहा जाता है कि ऊपर से आदेश आयेगा तभी खरीद पाएंगे आखिर किसान जाए तो जाए कहां |

किसानों के सपने टूटे, सरकार से जवाब की मांग

कई महीनों की मेहनत, लागत और परिश्रम के बाद भी यदि किसान अपनी फसल नहीं बेच पा रहे हैं, तो यह सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। तय है कि इस साल धान नहीं बेच पाने वाले किसानों के अरमान और सपने चकनाचूर हो चुके हैं। सवाल यह है कि जब सूबे के किसान ही चिंतित और परेशान हैं, तो क्या सरकार चैन से बैठ पाएगी?