सारंगढ़: रायगढ़ एवं बलौदाबाजार जिले से अलग होकर बने सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले मे बैष्णव समाज के पुनर्गठन होने के पश्चात नई कार्यकारिणी गठन हुई, परिणाम स्वरूप विगत वर्ष हज़ारों की संख्या में विष्णु महायज्ञ, सामूहिक विधवा एवं परित्यकता विवाह के साथ 161 बटुकों का उपन्यान संस्कार कराकर सारंगढ़ बिलाईगढ़ वैष्णव समाज ने प्रदेश के साथ पूरे भारतवर्ष में सारंगढ़ की माटी का मान बढ़ाया।
इसी तारतम्य में महासभा के एक वर्ष पूर्ण होने पश्चात बिलाईगढ़ अध्यक्ष एवं जिला कोषाध्यक्ष जितेंद्र वैष्णव एवं कार्यकारिणी के द्वारा वैष्णव समाज की समाजिक बैठक एवं होली मिलन समारोह का आयोजन भटगाँव के यादव धर्मशाला में रखा गया था। जिसमे सारंगढ़, कोसीर, बिलाईगढ़, बलौदाबाजार के अलावा शक्ति अंचल के पदाधिकारीगण भी उपस्थित रहे।
उक्त कार्यक्रम मे सामाजिक समस्याओं पर प्रकाश डालकर महिला एवं युवा इकाई के गठन पर विचार किया गया, साथ ही समाजिक नियमों पर विस्तृत चर्चा की गई।
महिला ससक्तिकरण के बिना समाज का विकास संभव नही – लखन दास वैष्णव
प्रदेश युवा अध्यक्ष एवं जिला महासचिव विश्वनाथ बैरागी ने संबोधन के दौरान युवाओं को समाज की भागीदारिता करने पर जोर देते हुए कहा कि समाज निर्माण में युवाओं की भूमिका आपकी सोच से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। युवा महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे हमारा भविष्य होंगे, आज वे हमारे भागीदार हो सकते हैं, कल वे समाज के लीडर बन जायेंगे। युवा बहुत ऊर्जावान और उत्साही हैं, हम युवाओं को अनदेखा करके उत्तम समाज की कल्पना नही कर सकते।
सारंगढ़ बिलाईगढ़ के जिलाध्यक्ष लखन दास वैष्णव ने समाज को सम्बोधित करते हुए कहा कि महिलाएं परिवार बनाती है, परिवार घर बनाता है, घर समाज बनाता है और समाज ही देश बनाता है। इसका सीधा सीधा अर्थ यही है की महिला का योगदान हर जगह है। महिला की क्षमता को नज़रअंदाज करके समाज की कल्पना करना व्यर्थ है। शिक्षा और महिला ससक्तिकरण के बिना परिवार, वैष्णव समाज और देश का विकास नहीं हो सकता।
युवा ही समाज के भविष्य – विश्वनाथ बैरागी
संगठन ही शक्ति है – जितेंद्र वैष्णव
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला कोषाध्यक्ष एवं बिलाईगढ़ मंडल अध्यक्ष ने समाजिक एकता पर बात करते हुए बताया कि अकेला मनुष्य शक्तिहीन है,जबकि संगठित होने पर उसमें शक्ति आ जाती है। संगठन की शक्ति से मनुष्य बड़े-बड़े कार्य भी आसानी से कर सकता है। संगठन में ही मनुष्य की सभी समस्याओं का हल है। जो परिवार और समाज संगठित होता है वहां हमेशा खुशियां और शांति बनी रहती है और ऐसा देश तरक्की के नित नए सोपान तय करता है। इसके विपरीत जो परिवार और समाज असंगठित होता है वहां आए दिन किसी न किसी बात पर कलह होती रहती है जिससे वहां हमेशा अशांति का माहौल बना रखता है। अतः वैष्णव समाज को हमेशा संगठित रहकर कार्य करना होगा।
उपरोक्त कार्यक्रम में लखनदास वैष्णव, विश्वनाथ बैरागी, जितेंद्र वैष्णव,जगन्नाथ बैरागी, शशिभूषण वैष्णव, खिलेश्वर वैष्णव, चुड़ामणि वैष्णव, घासीदास वैष्णव, कमल वैष्णव, श्रीमती मंजू वैष्णव, नवीन वैष्णव, पार्वती वैष्णव, नारायण वैष्णव, समेत सैकड़ों वैष्णव पदाधिकारीगण एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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