February 5, 2026

महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन — वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रगौरव के अमर प्रतीक

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बालोद।
आज 19 जनवरी को मेवाड़ के महान वीर, स्वतंत्रता और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप सिंह जी की पुण्यतिथि पर समूचे भारतवर्ष में श्रद्धा और सम्मान के साथ उन्हें नमन किया गया।

इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री एवं पूर्व बजरंग दल जिला संयोजक उमेश कुमार सेन ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन भारतीय इतिहास में साहस, स्वाभिमान और बलिदान की अमर गाथा है। उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि मातृभूमि की रक्षा और स्वराज के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले राष्ट्रनायक थे।

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान के कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआ था। उनके पिता महाराणा उदयसिंह द्वितीय एवं माता राणी जयवंताबाई थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में मातृभूमि की स्वतंत्रता की रक्षा हेतु अनेक युद्ध लड़े, जिनमें 18 जून 1576 को हुआ हल्दीघाटी का युद्ध सबसे प्रसिद्ध है, जो मुगल बादशाह अकबर की सेना के विरुद्ध लड़ा गया।

भले ही हल्दीघाटी का युद्ध निर्णायक रूप से समाप्त नहीं हुआ, लेकिन महाराणा प्रताप ने अपने अदम्य साहस, रणनीति और पराक्रम से मुगल सत्ता को कड़ी चुनौती दी और स्वतंत्रता की लौ को प्रज्वलित रखा। इसके बाद देवर और दिवेर के युद्धों में विजय प्राप्त कर उन्होंने मेवाड़ के कई हिस्सों को पुनः स्वतंत्र कराया।

महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि 19 जनवरी 1597 को मानी जाती है। उन्होंने भले ही इस दिन देह त्याग किया, लेकिन उनके आदर्श, राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान की भावना आज भी हर भारतीय के हृदय में जीवित है।

उमेश कुमार सेन ने कहा,
“महाराणा प्रताप भारत के स्वाभिमान और स्वतंत्रता के अमर प्रतीक हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्र की स्वतंत्रता सर्वोपरि होती है। उनकी पुण्यतिथि पर हम सभी उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लें।”

अंत में महाराणा प्रताप जी को शत-शत नमन करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष, त्याग और वीरता से प्रेरणा लेनी चाहिए।

“जिनके नाम से पर्वत भी गर्वित हो जाएं — वे हैं महाराणा प्रताप। भारतभूमि के उस महान सपूत को शत-शत कोटि नमन।