बालोद -डौंडी ब्लॉक में वन पट्टाधारी किसानों की समस्याओं को लेकर प्रशासन की उदासीनता लगातार सामने आ रही है। धान उपार्जन केंद्रों में वन पट्टाधारी किसानों का टोकन नहीं काटे जाने के कारण किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं। कई किसानों ने खेती के लिए कर्ज लिया है, लेकिन समय पर धान विक्रय नहीं होने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है।
प्रभावित किसानों में ग्राम चिखली निवासी
गिरिवर पिता जबलूराम (खसरा नंबर 421/2),
फूलसिंह पिता तीजूराम (415/4),
हेमराम पिता शिवनाथ (415/3),
निरधै राम पिता झिटकूराम (438)
तथा ग्राम काकड़कसा निवासी
बासनबाई पति सामाराम (353/2) शामिल हैं।
इन सभी किसानों ने पूर्व वर्षों में धान विक्रय किया था, लेकिन वर्तमान में रकबा का सत्यापन नहीं होने के कारण धान विक्रय नहीं हो पा रहा है।

किसानों का कहना है कि प्रशासन की लचर व्यवस्था के चलते उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई किसान कर्ज में डूब चुके हैं और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
पीड़ित किसानों ने अपनी समस्या जनपद पंचायत सदस्य तुलेश्वर हिचामी को अवगत कराया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद सदस्य ने तत्काल दूरभाष के माध्यम से कार्यपालन अधिकारी से चर्चा कर प्रशासन को चेताया। इसके बावजूद यदि दो से तीन दिनों के भीतर वन पट्टाधारी किसानों की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो किसानों के साथ मिलकर तहसील कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी गई है।
वन पट्टाधारी किसानों की अनदेखी कर रहा प्रशासन अब सवालों के घेरे में है, और यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तय माना जा रहा है।








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